Last Updated Feb - 10 - 2026, 06:23 PM | Source : Fela News
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। स्पीकर ने सचिवालय को नोटिस की तुरंत जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए है
संसद के बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के बीच एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर अब खुद स्पीकर की प्रतिक्रिया सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, ओम बिरला ने अपने सचिवालय को इस नोटिस की तत्काल जांच करने और नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब संसद में लगातार व्यवधान, कार्यवाही स्थगन और तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें सदन में जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा, जबकि सरकार और सत्तापक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है।
विपक्ष का क्या है आरोप
अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने वाले विपक्षी सांसदों का कहना है कि यह कदम किसी व्यक्तिगत द्वेष के तहत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाया गया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि विपक्ष संविधान में पूरा विश्वास रखता है और अध्यक्ष पद का सम्मान करता है, लेकिन बार-बार विपक्षी आवाजों को दबाया जाना चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना एक असाधारण कदम है, जो केवल असाधारण परिस्थितियों में ही उठाया जाता है।
सूत्रों के अनुसार, इस नोटिस पर कुल 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, कुछ दलों ने इस पहल से दूरी बनाए रखी है, जिससे विपक्षी एकजुटता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। स्पीकर ने सचिवालय को नोटिस की तुरंत जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लोकसभा स्पीकर की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद अब यह नोटिस तकनीकी और संवैधानिक जांच के दायरे में आ गया है। सचिवालय यह परखेगा कि प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के अनुरूप है या नहीं। नियमों के मुताबिक, ऐसे किसी प्रस्ताव के लिए तय संख्या में सांसदों का समर्थन और निर्धारित समयसीमा का पालन अनिवार्य होता है।
स्पीकर के निर्देश को राजनीतिक हलकों में यह संकेत माना जा रहा है कि वे इस पूरे मामले को संस्थागत और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना चाहते हैं, न कि इसे राजनीतिक विवाद में बदलने देना चाहते हैं।
संसद का माहौल और आगे की राह
इस बीच, संकेत मिल रहे हैं कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध को खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। संभावना जताई जा रही है कि सदन की कार्यवाही को दोपहर बाद सुचारू रूप से चलाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, अविश्वास प्रस्ताव का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद की राजनीति को और गरमा सकता है।
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के संसदीय इतिहास में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घटनाएं बेहद दुर्लभ रही हैं। ऐसे में यह मामला न केवल राजनीतिक, बल्कि संवैधानिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है।
फिलहाल, सबकी निगाहें सचिवालय की जांच और उसके बाद होने वाले अगले कदम पर टिकी हैं। यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बना रहेगा।
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