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लोकसभा स्पीकर हटाने की प्रक्रिया क्या, कितने सांसदों समर्थन चाहिए

लोकसभा स्पीकर हटाने की प्रक्रिया क्या, कितने सांसदों समर्थन चाहिए

Last Updated Feb - 10 - 2026, 06:00 PM | Source : Fela News

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को हटाने की विपक्षी तैयारी तेज हो गई है। जानिए स्पीकर हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया, जरूरी वोट और क्यों इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ।
लोकसभा स्पीकर हटाने की प्रक्रिया क्या
लोकसभा स्पीकर हटाने की प्रक्रिया क्या

 विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति पर गंभीरता से काम शुरू कर दिया है। बजट सत्र के दौरान बार-बार कार्यवाही स्थगित होने, विपक्षी सांसदों के निलंबन और नेताओं को बोलने का अवसर न मिलने को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन को निष्पक्ष रूप से चलाने की संवैधानिक जिम्मेदारी का पालन नहीं किया जा रहा, इसी कारण अब स्पीकर को हटाने जैसे असाधारण कदम पर विचार किया जा रहा है। 

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में हाल ही में कांग्रेस के सात सांसदों सहित आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन बड़ा कारण बताया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता को बोलने की अनुमति न मिलने पर भी सवाल उठे। INDIA ब्लॉक की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई और यही से स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की संभावना ने जोर पकड़ा। 

अब सवाल यह है कि लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया आखिर होती कैसे है? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 में इस प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख है। इसके अनुसार लोकसभा स्पीकर को केवल सदन में पारित एक विशेष प्रस्ताव के जरिए ही हटाया जा सकता है। यह कोई सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक रूप से बेहद सख्त नियमों से बंधी हुई व्यवस्था है। 

सबसे पहले स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव की लिखित सूचना देनी होती है। यह नोटिस कम से कम 14 दिन पहले दी जानी अनिवार्य है। इस प्रस्ताव को वैध माने जाने के लिए लोकसभा के कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। यदि यह न्यूनतम संख्या पूरी नहीं होती, तो प्रस्ताव स्वीकार ही नहीं किया जाता। 

नोटिस स्वीकार होने के बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तारीख तय की जाती है। नियमों के अनुसार, नोटिस स्वीकार होने के 10 दिन के भीतर इस पर चर्चा कराई जानी होती है। खास बात यह है कि जिस दिन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा होती है, उस दिन स्पीकर खुद सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करते। इस जिम्मेदारी को डिप्टी स्पीकर या किसी अन्य नामित सदस्य को सौंपा जाता है। 

मतदान के स्तर पर भी यह प्रक्रिया कई लोगों को चौंकाती है। स्पीकर को हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत नहीं होती, जैसा कि संविधान संशोधन में होता है। यहां केवल सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत पर्याप्त होता है। यानी अगर बहुमत प्रस्ताव के पक्ष में चला गया, तो स्पीकर को तुरंत पद छोड़ना होता है। 

हालांकि, भारतीय संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो अब तक ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता जब लोकसभा स्पीकर को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाया गया हो । यही कारण है कि विपक्ष की यह तैयारी न सिर्फ राजनीतिक बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है। 

अगर प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो स्पीकर पद से हट तो जाते हैं, लेकिन उनकी लोकसभा सदस्यता बनी रहती है। इसके बाद सदन नए स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करता है। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस प्रस्ताव को संख्याबल के स्तर पर कितना मजबूत बना पाता है। 

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