Last Updated Feb - 12 - 2026, 11:16 AM | Source : Fela News
लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है, आरोप है कि उन्होंने बजट सत्र में पक्षपातपूर्ण कार्यवाही की प्रक्रिया अब आगे बढ
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान बढ़ते तनाव और विपक्ष के आरोपों के बीच लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) का नोटिस विपक्षी दलों ने संसदीय सचिवालय में सौंप दिया है। यह राजनीतिक संघर्ष का एक बड़ा कदम है, जिससे सदन में चल रहे गतिरोध और कार्यवाही संचालन को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
प्रस्ताव क्यों लाया गया?
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर बिरला बजट सत्र के दौरान लगातार पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं और विपक्ष के नेताओं को Parliamentary कार्यवाही में बोलने का उचित अवसर नहीं दिया जा रहा है। विशेष रूप से विपक्ष ने यह कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हुई।
इसके अलावा विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि स्पीकर ने कुछ विवादित बयान दिए हैं और विपक्षी सदस्यों के निलंबन जैसे फैसलों में निष्पक्षता नहीं दिखाई है। आरोपों के अनुसार, यह सभी बातें मिलकर एक ऐसी परिस्थिति बना रही हैं जिसमें विपक्ष को लगता है कि स्पीकर द्वारा सदन की कार्यवाही निष्पक्ष रूप से संचालित नहीं हो रही।
नोटिस पेश और प्रक्रिया
विपक्षी दलों ने संविधान के अनुच्छेद 94 (C) और लोकसभा के नियम 94 (C) के तहत प्रस्ताव का नोटिस सौंपा। इस नोटिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं और इसे लोकसभा महासचिव को दिया गया है। अब यह प्रस्ताव संसदीय प्रक्रिया के अनुसार आगे की जांच के लिए सचिवालय द्वारा देखा जाएगा।
लोकसभा सचिवालय ने बताया है कि नोटिस में कुछ प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ पाई गईं, जिसकी वजह से इसे संशोधित कर नया नोटिस सौंपा गया है। इस कदम से यह सुनिश्चित किया गया कि प्रस्ताव केवल तकनीकी कारणों से खारिज न हो।
आगे की क्या प्रक्रिया है?
नियमों के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव को सदन में चर्चा और निर्णय के लिए कम से कम 14 दिन पहले सूचना दी जानी चाहिए। इसके बाद प्रस्ताव की वैधता पर विचार किया जाएगा और यदि यह स्वीकार होता है, तो आगे की कार्यवाही और बहस होगी। अभी यह तय नहीं हुआ है कि चर्चा कब होगी, लेकिन संसदीय सूत्रों के अनुसार यह बजट सत्र के दूसरे चरण में 9 मार्च को शुरू होने की संभावना है।
वर्तमान में स्पीकर बिरला ने कहा है कि वे वहां तब तक सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे जब तक इस प्रस्ताव को लेकर निर्णय नहीं हो जाता। यह कदम संसद में चल रहे गतिरोध और दोनों पक्षों के बीच तनाव को और उभार रहा है।
संसद के इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पहले भी कोशिशों के रूप में आए हैं, लेकिन सफलतापूर्वक पारित कर हटाया गया कोई अध्यक्ष नहीं है। विपक्ष की यह चुनौती संसदीय लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा के पुराने सिद्धांतों पर एक नए राजनीतिक विवाद की शुरुआत कर रही है।
इस प्रस्ताव को लेकर दोनों पक्षों का तर्क और प्रतिक्रिया संसद की कार्यवाही को अगले कुछ हफ्तों में और अधिक महत्वपूर्ण बना देगी। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के रूप में देख रहा है, जबकि सरकार और समर्थक दल इसे एक राजनीतिक चाल के रूप में पेश कर रहे हैं।
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