Last Updated Nov - 20 - 2025, 04:31 PM | Source : Fela News
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि दंगे ट्रंप दौरे के दौरान रची बड़ी साजिश थे।
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बहस में कहा है कि फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे सिर्फ विवाद नहीं था, बल्कि एक “रेज़िम-चेंज ऑपरेशन” की योजना थी। उन्होंने दावा किया है कि प्रदर्शन और दंगे जानबूझकर डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे के समय पर तय किए गए थे ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दुनिया की नज़र उन पर टिकी रहे।
पुलिस का कहना है कि अभियुक्तों, जैसे शरजील इमाम और उमर खालिद, ने मोबाइल चैट और अन्य तकनीकी सबूतों के ज़रिए मिली जानकारी के आधार पर यह बड़ी साज़िश रची थी। उनके दावों के मुताबिक, यह सिर्फ एक स्थानीय हिंसा नहीं थी, बल्कि देशव्यापी उथल-पुथल का हिस्सा हो सकती थी।
प्रॉसिक्यूशन ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि उदारवादी नागरिकता कानून (CAA) विरोध के नाम पर इस साजिश को “विश्व ध्यान” में लाने की कोशिश की गई, ताकि भारत की आंतरिक अस्थिरता को अंतरराष्ट्रीय मसले के रूप में पेश किया जाए।
पुलिस का तर्क है कि अभियुक्तों को बेल नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि यह पूरी घटना सिर्फ प्रोटेस्ट नहीं, बल्कि “सशस्त्र विद्रोह” तक की योजना का हिस्सा थी। उन्होंने कहा है कि उनके पास आंखों देखी (ocular), दस्तावेज़-आधारित और तकनीकी सबूत हैं, जो इस गहरी साजिश की गवाही देते हैं।
दूसरी तरफ, इमाम और खालिद की ओर से कहा जा रहा है कि उनका यह सब “अभिव्यक्ति का हिस्सा” था, दंगे अचानक हुए थे, और उनकी गिरफ्तारी और जेल में रहना कानूनी अधिकारों का हनन है। उनकी दलील है कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी हुई है और उनकी बढ़ती अवधि की हिरासत संवैधानिक आज़ादी के हक़ का उल्लंघन है।
यह विवाद अब SC के सामने है, क्या इतनी बड़ी साजिश स्वीकार्य है, या यह अब भी सिर्फ राजनीतिक आरोपों की लड़ाई है?