Last Updated Jan - 27 - 2026, 05:02 PM | Source : Fela News
UGC के नए नियमों को लेकर समाजवादी पार्टी के रुख पर उठ रहे सवालों के बीच प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने पार्टी की स्थिति साफ की। उन्होंने सवर्ण समाज से जुड़े आरोपों प
UGC के नए “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर जारी विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के रुख पर सवाल उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर यह चर्चा तेज है कि क्या सपा इन नियमों के मुद्दे पर सवर्ण समाज के साथ है या उनके खिलाफ। इसी संदर्भ में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया है।
रामगोपाल यादव ने कहा कि सपा किसी भी समाज या वर्ग के खिलाफ नहीं है और न ही किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने की राजनीति करती है। उनका कहना है कि पार्टी का स्टैंड हमेशा संविधान, सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांतों पर आधारित रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि UGC के नियमों को लेकर सपा की आपत्ति किसी जाति विशेष के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि नियमों की प्रकृति और संभावित प्रभावों को लेकर है।
बताया जा रहा है कि प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े किसी भी नियम का उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा और संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी नीति से समाज के किसी भी वर्ग में भ्रम या असंतोष पैदा हो रहा है, तो उस पर खुली बहस और संवाद जरूरी है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या मौजूदा नियम सभी वर्गों के लिए समान रूप से न्यायसंगत हैं, और इसी बिंदु पर सपा अपनी बात रख रही है।
इस बीच UGC के नियमों को लेकर देशभर में विरोध और समर्थन दोनों देखने को मिल रहे हैं। कुछ संगठन इन्हें समानता की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ वर्गों का कहना है कि नियमों के कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनका दुरुपयोग संभव है। इसी पृष्ठभूमि में सपा पर आरोप लगाए जा रहे थे कि वह सवर्ण समाज के खिलाफ रुख अपना रही है, जिसे रामगोपाल यादव ने खारिज किया है।
वहीं दूसरी ओर सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी का फोकस शिक्षा व्यवस्था को समावेशी और संतुलित बनाए रखने पर है। पार्टी का तर्क है कि किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले सभी पक्षों की आशंकाओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। इस पूरे विवाद के बीच रामगोपाल यादव के बयान को सपा के आधिकारिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे पार्टी ने अपनी स्थिति साफ करने की कोशिश की है।
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