Last Updated Jan - 31 - 2026, 05:16 PM | Source : Fela News
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल के बीच सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण से पहले शरद पवार से प्रस्तावित मुलाकात नहीं हो सकी, जिससे राजनीतिक संकेतों पर चर्चा तेज हुई।
महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े घटनाक्रम के बीच सुनेत्रा पवार की अहम राजनीतिक भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले सुनेत्रा पवार की एनसीपी प्रमुख शरद पवार से एक बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन यह बैठक तय समय से पहले ही टल गई। इसके बावजूद, उनकी ताजपोशी को लेकर औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ गई, जिससे पार्टी के भीतर और बाहर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि शरद पवार और पवार परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों से बातचीत को अहम माना जा रहा था, क्योंकि यह कदम एनसीपी की आंतरिक राजनीति और भविष्य की रणनीति से जुड़ा हुआ था। हालांकि, सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण से पहले इस मुलाकात का न होना राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह से देखा जा रहा है। कुछ नेताओं का कहना है कि यह केवल समय की कमी का मामला हो सकता है, जबकि अन्य इसे परिवार और पार्टी के भीतर चल रही असहमतियों से जोड़कर देख रहे हैं।
इस बीच, अजित पवार गुट के नेताओं का कहना है कि सरकार और संगठन के स्तर पर सभी फैसले सामूहिक चर्चा के बाद लिए गए हैं। उनके अनुसार, सुनेत्रा पवार को दी गई जिम्मेदारी प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए तय की गई है। वहीं दूसरी ओर, शरद पवार खेमे की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एनसीपी के भीतर पहले से मौजूद खींचतान के बीच यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया थी या इसके पीछे गहरे राजनीतिक संकेत छिपे हैं। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि शरद पवार की चुप्पी और प्रस्तावित बैठक का न होना आने वाले दिनों में पार्टी की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
वहीं दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि शपथ ग्रहण से जुड़ी सभी संवैधानिक प्रक्रियाएं तय नियमों के तहत पूरी की गई हैं और इसका आंतरिक बैठकों से सीधा संबंध नहीं है। फिलहाल, एनसीपी के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं और आने वाले समय में शरद पवार की भूमिका और रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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