Last Updated Jan - 30 - 2026, 05:48 PM | Source : Fela News
UGC के इक्विटी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जानिए किस नेता ने क्या कहा।
UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के इक्विटी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद देश की राजनीति और शैक्षणिक जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। इस फैसले को लेकर कवि कुमार विश्वास से लेकर बीजेपी और विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। ज्यादातर नेताओं ने अदालत के फैसले का स्वागत किया और इसे सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम कदम बताया।
सबसे पहले प्रसिद्ध कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि भारत इस समय किसी भी तरह के सामाजिक विभाजन को सहन करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारों और राजनेताओं को ऐसी नीतियों से बचना चाहिए, जो समाज में नई विभाजन रेखाएं खींचें । कुमार विश्वास ने यह भी स्वीकार किया कि दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के साथ सदियों से अन्याय हुआ है और उससे मुक्ति के प्रयास जरूरी हैं, लेकिन किसी भी निर्दोष व्यक्ति को नियमों के नाम पर फंसाया जाना सही नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजनीति इस मुद्दे का सकारात्मक और संतुलित समाधान निकालेगी।
बीजेपी विधायक पंकज सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वागत योग्य बताया। उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील और बड़ा मुद्दा था, जिस पर अदालत ने लाखों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया है। पंकज सिंह के अनुसार, इस रोक से समाज में फैले असमंजस और चिंता को कुछ हद तक शांत करने में मदद मिलेगी।
वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी के साथ अन्याय न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्चे न्याय में किसी भी वर्ग या व्यक्ति के साथ नाइंसाफी की कोई गुंजाइश नहीं होती। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि कानून केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि उसके पीछे का इरादा भी उतना ही साफ होना चाहिए।
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी इस फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि UGC के नए नियमों ने देश के कई विश्वविद्यालयों में सामाजिक तनाव का माहौल बना दिया था। मायावती ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि ऐसे नियम लागू करने से पहले सभी वर्गों और पक्षों को विश्वास में लेना जरूरी था। उनके मुताबिक, नए रेगुलेशन के चलते सामान्य वर्ग में भी असुरक्षा की भावना पैदा हो रही थी, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ।
मायावती ने यह भी कहा कि जातिवादी घटनाओं को रोकने का उद्देश्य सही हो सकता है, लेकिन नियमों का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में टकराव न बढ़े। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समयोचित बताते हुए कहा कि इससे हालात को संभालने का मौका मिलेगा।
कुल मिलाकर, UGC के इक्विटी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसलों में संतुलन कितना जरूरी है। अब निगाहें सरकार और UGC पर हैं कि आगे वे इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या ऐसा समाधान निकाल पाते हैं, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चल सके।
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