Last Updated Feb - 12 - 2026, 02:53 PM | Source : Fela News
मुंबई के कुर्ला स्टेशन पर ट्रेन से गिरते एक बुज़ुर्ग यात्री को टिकट चेकर ने फुर्ती दिखाते हुए बचा लिया। पूरी घटना CCTV में कैद हुई और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई
मुंबई की लोकल ट्रेनें शहर की जीवनरेखा मानी जाती हैं। हर दिन लाखों लोग इन ट्रेनों के सहारे अपने काम पर जाते और लौटते हैं। भीड़, भागदौड़ और समय की पाबंदी के बीच कई बार छोटी सी चूक बड़ा हादसा बन सकती है। लेकिन कुर्ला रेलवे स्टेशन पर हाल ही में जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि सतर्कता और इंसानियत मिलकर किसी की जान बचा सकती हैं।
ठाणे - CSMT लोकल ट्रेन के कुर्ला स्टेशन पर रुकते ही एक बुज़ुर्ग यात्री उतरने की कोशिश कर रहे थे। उम्र का असर और प्लेटफॉर्म पर मौजूद भीड़ के दबाव के कारण उनका संतुलन बिगड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उनका पैर फिसला और वे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिरने लगे। यह वह खतरनाक जगह होती है जहां मामूली सी देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
उसी समय स्टेशन पर तैनात एक टिकट चेकर (टीसी) की नजर इस घटना पर पड़ी। बिना एक पल गंवाए उन्होंने दौड़ लगाई। CCTV फुटेज में साफ दिखाई देता है कि टीसी तेज़ी से बुज़ुर्ग यात्री की ओर बढ़ते हैं और उन्हें गिरने से पहले पकड़कर अपनी ओर खींच लेते हैं। कुछ ही सेकंड में संभावित बड़ा हादसा टल गया। आसपास मौजूद लोग जब तक स्थिति समझ पाते, तब तक टीसी बुजुर्ग को सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर ला चुके थे।
घटना के बाद बुज़ुर्ग यात्री को संभाला गया और उन्हें प्राथमिक सहायता दी गई। बताया जा रहा है कि वे घबराए हुए थे, लेकिन सुरक्षित थे। मौके पर मौजूद यात्रियों ने राहत की सांस ली और टीसी की बहादुरी की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि अगर थोड़ी भी देर हो जाती, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे।
यह पूरी घटना स्टेशन पर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, लोगों ने टीसी को "देवदूत" और "फरिश्ता" कहकर संबोधित करना शुरू कर दिया। यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि ऐसे रेलवे कर्मचारी ही मुंबई लोकल की असली ताकत हैं। कई लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि टीसी को सम्मानित किया जाना चाहिए।
रेलवे अधिकारियों ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कर्मचारियों को यात्रियों की सुरक्षा के लिए हमेशा सतर्क रहने की ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि, हर परिस्थिति में इतनी तेज़ और सही प्रतिक्रिया देना आसान नहीं होता। यह घटना न केवल पेशेवर जिम्मेदारी बल्कि मानवीय संवेदना का भी उदाहरण है।
मुंबई जैसे महानगर में, जहां हर दिन करोड़ों कदम एक साथ चलते हैं, वहां छोटी-सी लापरवाही बड़ा खतरा बन सकती है। लेकिन कुर्ला स्टेशन की यह घटना याद दिलाती है कि भीड़ और अफरा-तफरी के बीच भी इंसानियत जिंदा है। उस दिन एक टीसी ने सिर्फ अपनी ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि एक परिवार को संभावित बड़े दुख से बचा लिया।
यह घटना हमें भी सावधान रहने का संदेश देती है— चलती या रुकती ट्रेन से उतरते समय धैर्य रखें, भीड़ में जल्दबाजी न करें और हमेशा सुरक्षा को प्राथमिकता दें। क्योंकि कभी-कभी एक सेकंड की सावधानी और एक इंसान की तत्परता किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।
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