Last Updated Jan - 23 - 2026, 05:57 PM | Source : Fela News
केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान सामने आई है। सांसद शशि थरूर की हाईकमान बैठक से दूरी ने सियासी चर्चाएं तेज कर दी हैं।
कैरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर का हाईकमान द्वारा बुलाई गई अहम बैठक से दूरी बनाना कई सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि हाल के घटनाक्रमों से उपजी नाराजगी का नतीजा है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कोच्चि में हाल ही में आयोजित महापंचायत के दौरान हुई कुछ घटनाओं से शशि थरूर असंतुष्ट है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम स्थल पर बैठने की व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर उन्हें आपत्ति थी। धरूर का मानना था कि उनकी वरिष्ठता और पद के अनुरूप व्यवस्था नहीं की गई, जिसे उन्होंने अपने सम्मान से जोड़कर देखा।
सूत्रों के अनुसार, शशि थरूर को कार्यक्रम स्थल पर तय समय से पहले पहुंचने और अपना भाषण जल्दी खत्म करने के निर्देश दिए गए थे। इससे वे असहज महसूस कर रहे थे। उन्हें यह भी बताया गया था कि उनके बाद केवल राहुल गांधी ही मंच से संबोधन करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राहुल गांधी के बाद छह अन्य नेताओं ने भी भाषण दिए, जिनमें से कुछ नेता पार्टी में शशि थरूर से कनिष्ठ माने जाते हैं। इस घटनाक्रम ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी।
इतना ही नहीं, सूत्रों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में शशि थरूर का नाम नहीं लिया। थरूर इसे पार्टी के भीतर खुद को नजरअंदाज किए जाने के तौर पर देख रहे हैं। उनके करीबी लोगों का मानना है कि लगातार ऐसे संकेत मिलने से उनका असंतोष गहराता गया और इसी कारण उन्होंने हाईकमान की बैठक में शामिल न होने का फैसला किया। यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर और केरल कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चा सामने आई हो। इससे पहले भी वायनाड में हुई एक बैठक के दौरान ऐसी खबरें आई थीं। हालांकि, उस समय पार्टी नेताओं और थरूर दोनों की ओर से कहा गया था कि कांग्रेस में कोई मतभेद नहीं है और सभी मिलकर चुनाव की तैयारी करेंगे।
राजनीतिक हलचल के बावजूद शशि थरूर पूरी तरह सक्रिय बने हुए हैं। वे शुक्रवार को कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल में हिस्सा लेंगे। इससे संकेत मिलता है कि वे राजनीतिक गतिविधियों से दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि अपनी असहमति को अलग तरीके से जाहिर कर रहे हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन चुनाव से ठीक पहले इस तरह की अंदरूनी खींचतान को पार्टी के लिए चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते असंतोष को दूर नहीं किया गया, तो इसका असर केरल में कांग्रेस की चुनावी रणनीति और एकजुटता पर पड़ सकता है।
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