Last Updated Feb - 24 - 2026, 01:16 PM | Source : Fela News
WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि वह डेटा शेयरिंग नीति में भारत की CCI के निर्देशों का पालन करेगा। Meta की जिम्मेदारियों और यूजर्स के डेटा सुरक्षा उपायों पर बड़ा बयान आया।
WhatsApp ने भारत में डेटा शेयरिंग और प्राइवेसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, और यह कहा है कि वह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगा। यह अपडेट इस बात पर आया है कि पिछले कुछ समय से यूजर्स, टेक विशेषज्ञ और सरकारी एजेंसियों की चिंता थी कि WhatsApp Meta कंपनी के साथ डेटा साझा कैसे करता है और किस हद तक भारतीय नियमों का पालन करता है।
WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट में भरोसा जताया है कि भारत के डिजिटल और डेटा सुरक्षा नियमों का सम्मान किया जाएगा। Meta के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने यह भी कहा कि वह CCI द्वारा तय की गई शर्तों और निर्देशों को मानने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भारतीय यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सके। CCI ने पिछले साल WhatsApp की डेटा शेयरिंग प्रथाओं पर खुद जांच की थी और पाया था कि कई मामलों में भारतीय यूजर्स के डेटा को Meta के अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा करना वैश्विक नियमों और स्थानीय कानूनों के अनुरूप नहीं था। WhatsApp के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कंपनी भारत में अपने प्राइवेसी नियमों को अपडेट कर रही है।
नए बदलाव यह सुनिश्चित करेंगे कि डेटा की विदेश भेजने, प्रोसेसिंग और स्टोरिंग के मामले में भारतीय कानून सर्वोच्च रहेगा और Meta अपनी वैश्विक डेटा प्रोसेसिंग पॉलिसीज को सीधे लागू नहीं करेगा जब तक वह भारतीय नियमों के अनुरूप न हों। यह कदम कई विशेषज्ञों और यूजर्स द्वारा डिमांड किए जाने के बाद उठाया गया है, ताकि डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी उल्लंघनों की आशंका कम हो।
WhatsApp की इस प्रस्तुति का सीधा असर CCI की ओर से जारी डेटा शेयरिंग और प्रतिस्पर्धा मामलों पर पड़ेगा। CCI ने पहले ही कहा था कि Meta को भारत की प्रतिस्पर्धा नीतियों का पालन करना चाहिए, और अगर कंपनी इसके निर्देशों का पालन नहीं करती है, तो उसे भारी जुर्माना या और सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह किसी भी प्रकार की अनिवार्य डेटा शेयरिंग नियमों को लागू करते समय CCI के फैसलों और निर्देशों को प्राथमिकता देगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि भारत डेटा सुरक्षा, डिजिटल बाजारों में प्रतिस्पर्धा और प्राइवेसी के नियमों को पहले से और सख्ती से लागू करना चाहता है। पिछले कुछ वर्षों में Meta के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स जैसे Facebook, Instagram और WhatsApp के बीच डेटा साझा करने की प्रैक्टिस को लेकर वैश्विक स्तर पर सवाल उठे हैं, और भारत ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाया है।
WhatsApp के सुप्रीम कोर्ट में दिया गया बयान इस बात का संकेत देता है कि कंपनी भारत को एक अलग और विशेष डेटा सुरक्षा बाज़ार मानती है, जहां के नियम और कानून अंतरराष्ट्रीय मानकों से मेल खाते हैं लेकिन अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं पर भी जोर देते हैं। यह भी कहा गया है कि किसी भी डेटा फ़्लो को CCI के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रखा जाएगा, चाहे वह यूजर्स की निजी जानकारी हो या व्यावसायिक डेटा।
हालाँकि WhatsApp और Meta ने यह स्पष्ट किया है कि डेटा शेयरिंग के नए नियम लागू होने से यूज़र को कोई सीमितता या परेशानी नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद कई प्राइवेसी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि नियमों की सही निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उनका मानना है कि तकनीकी कंपनियों को डेटा सुरक्षा के मामले में न सिर्फ कानून का पालन करना चाहिए बल्कि यूजर्स को स्पष्ट जानकारी भी देनी चाहिए कि उनका डेटा किस प्रकार उपयोग किया जा रहा है।
WhatsApp के इस सुप्रीम कोर्ट अपडेट से यह उम्मीद की जा रही है कि आगे डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा के नियम और भी स्पष्ट और मजबूत बनेंगे, जिससे भारतीय यूजर्स के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सके। यह कदम भारत के डिजिटल सुरक्षा परिदृश्य में एक बड़ी प्रगति माना जा रहा है।
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