Last Updated Oct - 08 - 2025, 04:55 PM | Source : Fela News
लंबे समय बाद अखिलेश यादव और आज़म खान की मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल मचा दी है। सवाल यही है —क्या यह मुलाकात मुस्लिम वोट बैंक को दोबारा सपा के
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी अखिलेश यादव और आज़म खान की जोड़ी सपा की सबसे मजबूत कड़ी मानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह रिश्ता ठंडा पड़ गया। रामपुर से दूरी और राजनीतिक मतभेदों ने दोनों नेताओं के बीच खामोशी की दीवार खड़ी कर दी थी। अब अखिलेश यादव का रामपुर दौरा और आज़म खान से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर फिर शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में सपा के संगठन, मुस्लिम नेतृत्व और आगामी विधानसभा उपचुनाव को लेकर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि अखिलेश अब आज़म खान को फिर से पार्टी की सक्रिय भूमिका में लाना चाहते हैं ताकि पश्चिमी यूपी और रोहिलखंड में सपा की पकड़ मजबूत हो सके।
रामपुर, जो कभी सपा का गढ़ माना जाता था, आज वही क्षेत्र पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। आज़म खान के राजनीतिक प्रभाव में कमी और बीजेपी की लगातार बढ़ती पकड़ ने समीकरण बदल दिए हैं। सपा जानती है कि अगर मुस्लिम वोट बैंक फिर बिखर गया, तो पार्टी के लिए 2027 की राह और मुश्किल हो जाएगी।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मुलाकात सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक है। सपा को मुस्लिम समाज में फिर भरोसा जगाने के लिए आज़म खान जैसे नेताओं की जरूरत है, जो जमीनी पकड़ रखते हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या पुराने गिले-शिकवे इतनी आसानी से मिट पाएंगे?
अखिलेश और आज़म की यह मुलाकात सपा के लिए नई शुरुआत भी साबित हो सकती है और अगर तालमेल नहीं बैठा, तो अंदरूनी दरारें और गहरी हो सकती हैं। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि यह साथ मजबूरी में हुआ है या सियासी मजबूती के लिए।