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Chhath Puja 2025: बच्चों को छठ से जोड़ने के आसान और प्रभावी तरीके

Chhath Puja 2025: बच्चों को छठ से जोड़ने के आसान और प्रभावी तरीके

Last Updated Oct - 24 - 2025, 02:43 PM | Source : Fela News

Chhath Puja 2025: महिलाएं अपने परिवार और बच्चों की लंबी उम्र के लिए छठ व्रत करती हैं, लेकिन आजकल के बच्चों को त्योहार की परंपराओं के बारे में ज्यादा जानकारी नही
बच्चों को छठ से जोड़ने के आसान और प्रभावी तरीके
बच्चों को छठ से जोड़ने के आसान और प्रभावी तरीके

Chhath Puja 2025: छठ पूजा हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाई जाती है। इस साल यह पर्व 25 अक्टूबर से शुरू होकर 28 अक्टूबर तक चलेगा। यह पर्व दिवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है और सूर्य देव तथा छठी मैया को समर्पित होता है। माना जाता है कि सूर्य देव जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य के दाता हैं, जबकि छठी मैया संतान की रक्षक देवी हैं। इसलिए महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और संतान की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं।

बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और देश के कई हिस्सों में छठ का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन आजकल बच्चों को इस त्योहार की परंपराओं और महत्व के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। ऐसे में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चों को इस पर्व से जोड़ें।

बच्चों को छठ से जोड़ने के तरीके:

सूर्य का महत्व समझाएं:

छठ पूजा में सूर्य का सबसे ज्यादा महत्व है। उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। बच्चों को बताएं कि सूर्य की पूजा क्यों की जाती है और इसका जीवन में क्या महत्व है। इससे बच्चे नेचर और पर्यावरण के प्रति आभार सीखेंगे।

नहाय-खाय की परंपरा बताएं:

छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। इस दिन व्रती महिलाएं नहाकर सात्विक भोजन बनाती और खाती हैं। आप बच्चों को इस दिन साफ-सफाई, सादगी और पवित्रता का महत्व समझा सकते हैं।

त्याग और संयम की सीख:

छठ पूजा में 36 घंटे का निर्जला व्रत होता है। इसमें महिलाएं बिना भोजन और पानी के रहकर परिवार और बच्चों की लंबी उम्र की कामना करती हैं। बच्चों को यह समझाएं कि महिलाएं अपने परिवार की खुशी के लिए कितना त्याग करती हैं।

पारंपरिक परंपरा दिखाएं:

अगर संभव हो तो बच्चों को घाट पर ले जाएं, जहां सूर्य देव की पूजा और लोकगीत होते हैं। सूर्योदय के समय जल में खड़े होकर पूजा देखने से बच्चे छठ के महत्व को अच्छे से समझ पाएंगे।

मेला और लोक संस्कृति से जोड़ें:

छठ के समय कई जगह मेले लगते हैं। बच्चों को लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा और पूजा की सामग्री दिखाकर अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

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