Last Updated Dec - 08 - 2025, 12:41 PM | Source : Fela News
Diamond Types: हीरे केवल एक तरह के नहीं होते, बल्कि कई प्रकार के होते हैं. आइए जानते हैं हीरों के अलग-अलग प्रकार और उनमें क्या अंतर है.
Diamond Types: हीरे भले ही सभी चमकदार दिखते हों, लेकिन वे एक जैसे नहीं होते। उनकी उत्पत्ति, केमिस्ट्री, शुद्धता और कारीगरी में अंतर होता है। हीरों के अलग-अलग प्रकार होते हैं, जिनकी अपनी खासियत और कीमत होती है। आइए जानते हैं हीरों के मुख्य प्रकार और उनके अंतर।
नेचुरल हीरे और लैब ग्रोन हीरे
हीरों को मुख्य रूप से नेचुरल और लैब ग्रोन हीरों में बांटा जाता है। नेचुरल हीरे अरबों सालों में धरती के भीतर उच्च दबाव और गर्मी से बनते हैं। इनमें अक्सर नाइट्रोजन या बोरॉन जैसी थोड़ी अशुद्धियां होती हैं, जो उनके रंग को प्रभावित करती हैं।
लैब ग्रोन हीरे कंट्रोल्ड माहौल में बनते हैं, जैसे हाई प्रेशर-हाई टेंपरेचर (HPHT) या केमिकल वेपर डिपोजिशन तकनीक का उपयोग करके। हालांकि ये लैब में बनाए जाते हैं, फिर भी इनके केमिकल और फिजिकल गुण नेचुरल हीरों जैसे ही होते हैं। इनकी कीमत भी क्लेरिटी, कट, रंग और कैरेट वजन के आधार पर तय होती है।
केमिकल प्रकार
हीरों को उनके अंदर फंसे तत्वों के आधार पर केमिकल प्रकार में बांटा जाता है:
टाइप Ia और Ib: टाइप Ia हीरे में नाइट्रोजन एटम गुच्छों में होते हैं और ये अक्सर पीले या भूरे रंग के दिखते हैं। टाइप Ib हीरों में नाइट्रोजन अलग-अलग एटम के रूप में होता है, जिससे गहरा पीला रंग आता है।
टाइप IIa: इसमें कोई अशुद्धि नहीं होती। ये बेहद साफ और कीमती होते हैं, जैसे कोहिनूर हीरा।
टाइप IIb: बोरॉन के मिलने से यह नीला या ग्रे रंग का होता है। ये दुर्लभ होते हैं और बिजली के कंडक्टर भी होते हैं।
रंगों में अंतर
हीरे के रंग उसकी खासियत में शामिल हैं। रंगहीन हीरे सबसे दुर्लभ और महंगे होते हैं। पीले या भूरे हीरों का रंग नाइट्रोजन के कारण होता है। नीले हीरे में बोरॉन होता है, जबकि गुलाबी, लाल और हरे हीरे बेहद दुर्लभ और महंगे माने जाते हैं।