Last Updated Feb - 20 - 2026, 11:10 AM | Source : Fela News
शकरकंद और गुड़ को पानी में भिगोकर बनाई गई जैविक खाद पौधों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह मिट्टी की गुणवत्ता सुधारकर पौधों में तेजी से ग्रोथ और फूल बढ़ाती है।
आज के समय में लोग अपने घरों में गार्डनिंग का शौक तेजी से अपना रहे हैं, लेकिन पौधों की सही देखभाल और पोषण देना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। आमतौर पर लोग रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पौधे तो तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
ऐसे में अब लोग प्राकृतिक और जैविक खाद की ओर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। इसी बीच गार्डनिंग एक्सपर्ट्स ने एक आसान और सस्ता तरीका बताया है, जिसमें रसोई में मौजूद शकरकंद और गुड़ का इस्तेमाल कर शक्तिशाली जैविक खाद तैयार की जा सकती है।
गार्डनिंग विशेषज्ञों के अनुसार, शकरकंद और गुड़ को पानी में भिगोकर तैयार किया गया घोल पौधों के लिए प्राकृतिक पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत बन जाता है। इस मिश्रण में मौजूद पोटेशियम, मैग्नीशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व पौधों की जड़ों को मजबूत करते हैं और उनकी वृद्धि को तेज करते हैं। यह खाद मिट्टी में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाती है, जिससे मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं।
इस जैविक खाद को तैयार करना बेहद आसान है। इसके लिए सबसे पहले एक या दो मध्यम आकार के शकरकंद लेकर उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इन टुकड़ों को एक कांच या प्लास्टिक के जार में डालकर उसमें पानी भर दें। अब इस मिश्रण में थोड़ा सा गुड़ मिलाएं।
गुड़ इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह बैक्टीरिया के लिए ऊर्जा का स्रोत बनता है और फर्मेटेशन प्रक्रिया को तेज करता है। जार को ढक्कन से बंद करके लगभग एक सप्ताह तक छायादार स्थान पर रखें। कुछ दिनों बाद यह मिश्रण एक प्रभावी लिक्विड फर्टिलाइजर में बदल जाता है।
इस खाद का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मौजूद पोटेशियम पौधों के फूल और फल बनने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। जिन पौधों में फूल कम आते हैं या पत्तियां कमजोर दिखती हैं, उनमें इस खाद के उपयोग से सकारात्मक बदलाव देखा जा सकता है। इसके अलावा फर्मेटेशन के दौरान निकलने वाला मैग्नीशियम पौधों में क्लोरोफिल के निर्माण में मदद करता है, जिससे पत्तियां अधिक हरी, चमकदार और स्वस्थ दिखाई देती हैं।
गार्डनिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस प्राकृतिक खाद का नियमित उपयोग करने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। यह पौधों को बीमारियों से बचाने में मदद करता है और उनकी ग्रोथ को संतुलित तरीके से बढ़ाता है। खासकर गुलाब, गुड़हल, मनी प्लांट और अपराजिता जैसे पौधों में इसके उपयोग से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह खाद पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल है। इससे न केवल पौधे स्वस्थ रहते हैं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहती है। कम लागत और आसान प्रक्रिया के कारण यह तरीका घरेलू गार्डनिंग करने वालों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
यह सरल उपाय साबित करता है कि रसोई में मौजूद साधारण चीजें भी बगीचे को हरा-भरा और सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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