Last Updated Feb - 12 - 2026, 03:49 PM | Source : Fela News
घर में मौजूद साधारण चीजों से बनी यह जैविक खाद गुलाब की ग्रोथ बढ़ाने, जड़ों को मजबूत करने और फंगल समस्याओं से बचाने में मदद करती है। 24 घंटे में तैयार घोल असरदार
हर गार्डनिंग प्रेमी की ख्वाहिश होती है कि उसके बगीचे में लगे गुलाब के पौधे हरे-भरे रहें और उन पर रंग-बिरंगे फूलों की बहार छाई रहे। लेकिन कई बार पौधों की धीमी ग्रोथ, पीले पड़ते पत्ते या कम कलियां आना चिंता का कारण बन जाता है। खासतौर पर सर्दियों और बसंत के मौसम में गुलाब को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है। ऐसे में केमिकल फर्टिलाइजर के बजाय जैविक और घरेलू उपाय ज्यादा सुरक्षित और असरदार माने जाते हैं।
गार्डनिंग विशेषज्ञों का मानना है कि घर की रसोई में मौजूद कुछ साधारण चीजों से तैयार घोल गुलाब के पौधों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। सरसों की खली, प्याज के छिलके और मीठा सोडा मिलाकर बनाई जाने वाली यह खाद मात्र 24 घंटे में तैयार हो जाती है और पौधों की सेहत सुधारने में मदद करती है।
इस घोल को तैयार करने के लिए सबसे पहले एक साफ प्लास्टिक या कांच का कंटेनर लें। उसमें लगभग 800 से 850 मिलीलीटर सामान्य तापमान का पानी डालें। बहुत गर्म या ठंडा पानी इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे फर्मेंटेशन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके बाद एक मुट्ठी प्याज के सूखे छिलके पानी में डालें। प्याज के छिलकों में पोटेशियम और आयरन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो फूलों के रंग को निखारने और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
अगले चरण में एक से दो चम्मच भिगोई हुई सरसों की खली मिलाएं। सरसों की खली नाइट्रोजन का अच्छा स्रोत है, जो पत्तियों की हरियाली और नई टहनियों की ग्रोथ के लिए जरूरी है। अंत में लगभग एक चौथाई चम्मच मीठा सोडा डालें । मीठा सोडा मिट्टी के pH स्तर को संतुलित करने और फफूंद जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है।
सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाने के बाद कंटेनर को ढक दें और इसे छायादार स्थान पर 24 घंटे के लिए रख दें। इस दौरान हल्की फर्मेंटेशन प्रक्रिया होती है, जिससे पोषक तत्व पानी में घुलकर पौधों के लिए अधिक उपयोगी रूप में तैयार हो जाते हैं। अगले दिन घोल का रंग थोड़ा गाढ़ा दिखाई देगा, जो इसके तैयार होने का संकेत है।
इस गाढ़े मिश्रण को सीधे पौधे की जड़ों में न डालें। पहले इसमें डेढ़ से दो गुना सादा पानी मिलाकर इसे पतला कर लें। फिर गुलाब के पौधे की जड़ों के आसपास हल्की गुड़ाई करके यह घोल डालें। ध्यान रखें कि खाद डालते समय मिट्टी हल्की नम हो, ताकि पोषण आसानी से जड़ों तक पहुंच सके।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस जैविक खाद का उपयोग 15 से 20 दिन के अंतराल पर किया जाए। नियमित उपयोग से पौधों में नई कलियां तेजी से आने लगती हैं, पत्तियां घनी और चमकदार होती हैं तथा फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है। हालांकि, मात्रा का संतुलन जरूरी है, क्योंकि अत्यधिक खाद भी पौधे को नुकसान पहुंचा सकती है।
सही देखभाल, पर्याप्त धूप और समय-समय पर जैविक खाद के इस्तेमाल से गुलाब का पौधा न केवल स्वस्थ रहता है, बल्कि बगीचे की शोभा भी कई गुना बढ़ा देता है।
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