Last Updated Feb - 24 - 2026, 10:52 AM | Source : Fela News
क्या ब्लैक होल सच में आवाज निकालते हैं या यह सिर्फ वैज्ञानिक डेटा की व्याख्या है? जानिए नासा की खोज, ग्रेविटेशनल वेव्स और इस रहस्य के पीछे की असली सच्चाई।
ब्लैक होल को अक्सर ब्रह्मांड का सबसे रहस्यमयी और डरावना हिस्सा माना जाता है। इन्हें 'कॉस्मिक मॉन्स्टर' भी कहा जाता है, क्योंकि इनकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति इतनी प्रबल होती है कि रोशनी तक इनसे बच नहीं पाती।
हाल के वर्षों में यह दावा चर्चा में रहा कि ब्लैक होल के पास से अजीब आवाजें आती हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ ऑडियो क्लिप्स ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या अंतरिक्ष में सचमुच आवाज हो सकती है?
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो अंतरिक्ष लगभग एक वैक्यूम है। आवाज को यात्रा करने के लिए माध्यम जैसे हवा या पानी की जरूरत होती है। पृथ्वी पर हम जो भी ध्वनि सुनते हैं, वह हवा के जरिए हमारे कानों तक पहुंचती है। लेकिन स्पेस में हवा नहीं होती, इसलिए पारंपरिक अर्थ में वहां कोई 'आवाज' नहीं हो सकती। इसका मतलब यह है कि ब्लैक होल सीधे तौर पर ध्वनि उत्पन्न नहीं करते।
फिर यह आवाज आई कहां से? इसका उत्तर गैलेक्सी क्लस्टर में मौजूद गर्म गैस में छिपा है। कुछ गैलेक्सी क्लस्टर, जैसे पर्सियस क्लस्टर, में अत्यधिक गर्म और घनी गैस मौजूद होती है।
जब कोई सुपरमैसिव ब्लैक होल अपने आसपास के पदार्थ को खींचता है या शक्तिशाली ऊर्जा जेट्स छोड़ता है, तो यह गैस में दबाव तरंगें (प्रेशर वेव्स) पैदा करता है। ये तरंगें उसी तरह फैलती हैं जैसे पृथ्वी पर हवा में साउंड वेव्स फैलती हैं।
2022 में नासा ने पर्सियस गैलेक्सी क्लस्टर के केंद्र में स्थित ब्लैक होल से जुड़े डेटा को 'सोनिफिकेशन" प्रक्रिया के जरिए ऑडियों में बदला। मूल तरंगों की फ्रीक्वेंसी इतनी कम थी कि वह मानव सुनने की क्षमता से करीब 57 ऑक्टेव नीचे थी। वैज्ञानिकों ने इन फ्रीक्वेंसी को लाखों-करोड़ों गुना बढ़ाया ताकि उन्हें सुना जा सके। जो ध्वनि सामने आई, वह गहरी और कंपन जैसी थी। कुछ लोगों ने इसकी तुलना 'ॐ' मंत्र से भी की, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक संयोग है।
इसके अलावा, ब्लैक होल की टक्कर से उत्पन्न ग्रेविटेशनल वेव्स भी एक अहम पहलू हैं। जब दो ब्लैक होल आपस में टकराते हैं, तो स्पेस-टाइम में तरंगें बनती हैं। LIGO जैसी वेधशालाओं ने इन तरंगों को रिकॉर्ड किया है। जब इन्हें ऑडियो सिग्नल में बदला जाता है, तो एक छोटी 'चिरप' जैसी आवाज सुनाई देती है। यह असल ध्यनि नहीं, बल्कि डेटा का अनुवाद है।
स्पष्ट है-ब्लैक होल पारंपरिक अर्थ में आवाज नहीं निकालते। जो हम सुनते हैं, वह अंतरिक्ष में घूमती ध्वनि नहीं, बल्कि वैज्ञानिक उपकरणों से रिकॉर्ड किए गए डेटा की व्याख्या है। यह रहस्य टेक्नोलॉजी और विज्ञान की अद्भुत प्रगति का परिणाम है, जो हमें ब्रह्मांड की अनदेखी दुनिया को 'सुनने का अनुभव कराता है।
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