Last Updated Feb - 16 - 2026, 03:23 PM | Source : Fela News
गार्डनिंग एक्सपर्ट के अनुसार छाछ पौधों के लिए प्राकृतिक खाद और फंगीसाइड का काम करती है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर पत्तियां बड़ी, चमकदार और फूलों की संख्या ब
घर में मौजूद साधारण छाछ न सिर्फ शरीर के लिए फायदेमंद होती है, बल्कि पौधों की सेहत के लिए भी किसी प्राकृतिक टॉनिक से कम नहीं है। गार्डनिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि छाछ में मौजूद पोषक तत्व और लाभकारी बैक्टीरिया मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं, जिससे पौधों की ग्रोथ तेजी से होती है और उनमें अधिक फूल और बड़ी पत्तियां विकसित होती हैं। खास बात यह है कि यह एक सस्ता और सुरक्षित विकल्प है, जिसे आसानी से घर पर तैयार किया जा सकता है।
छाछ में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया मिट्टी में मौजूद हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया को नियंत्रित करते हैं। यही कारण है कि छाछ का इस्तेमाल करने से पौधे न केवल तेजी से बढ़ते हैं, बल्कि बीमारियों से भी सुरक्षित रहते हैं। कई गार्डनिंग एक्सपर्ट्स ने इसे पौधों के लिए प्राकृतिक ग्रोथ बूस्टर बताया है।
हालांकि, छाछ को सीधे पौधों में डालना सही नहीं माना जाता। एक्सपर्ट्स के अनुसार छाछ काफी एसिडिक होती है और इसे बिना पतला किए इस्तेमाल करने से जड़ों को नुकसान हो सकता है।
सही तरीका यह है कि एक भाग छाछ में पांच भाग पानी मिलाकर एक हल्का घोल तैयार किया जाए। इस घोल को पौधों की जड़ों में धीरे-धीरे डालना चाहिए। इससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मिलते हैं और मिट्टी का संतुलन भी बना रहता है।
छाछ का उपयोग फूलों वाले पौधों जैसे गुलाब, गुड़हल और अपराजिता के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है। इसका नियमित इस्तेमाल करने से पौधों में नई कलियां तेजी से विकसित होती हैं और फूलों का आकार भी बड़ा होता है।
इसके अलावा सब्जियों के पौधों जैसे टमाटर, मिर्च और बैंगन में भी छाछ का असर देखा गया है। इससे पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और उत्पादन में भी सुधार होता है।
छाछ को प्राकृतिक फंगीसाइड के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि पौधों की पत्तियों पर सफेद धब्बे या फंगस दिखाई दें, तो छाछ के पतले घोल का स्प्रे करने से संक्रमण कम हो सकता है। यह पत्तियों को साफ और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। पुराने समय से किसान भी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए छाछ का उपयोग करते रहे हैं।
गार्डनिंग विशेषज्ञों का कहना है कि हर 10 से 15 दिन में एक बार छाछ के घोल का इस्तेमाल करना पर्याप्त होता है। अधिक मात्रा में इसका उपयोग करने से मिट्टी का संतुलन बिगड़ सकता है, इसलिए सीमित मात्रा में ही इसका प्रयोग करना चाहिए।
सही तरीके से इस्तेमाल करने पर छाछ पौधों के लिए एक प्राकृतिक और प्रभावी खाद साबित हो सकती है, जिससे बगीचा हरा-भरा और आकर्षक बना रहता है।
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