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शतरंज के युवा विश्व चैंपियन डी गुकेश ने तिरुमला मंदिर में टेका माथा, जानिए उनके संघर्ष और सफलता की कहानी

शतरंज के युवा विश्व चैंपियन डी गुकेश ने तिरुमला मंदिर में टेका माथा, जानिए उनके संघर्ष और सफलता की कहानी

Last Updated Mar - 15 - 2025, 12:16 PM | Source : Fela News

युवा शतरंज विश्व चैंपियन डी गुकेश ने तिरुमला मंदिर में दर्शन किए। कड़ी मेहनत और संघर्ष से शिखर तक पहुंचे गुकेश की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है, जिसने भारत का न
शतरंज के युवा विश्व चैंपियन डी गुकेश के संघर्ष और सफलता की कहानी
शतरंज के युवा विश्व चैंपियन डी गुकेश के संघर्ष और सफलता की कहानी

दुनिया में अपनी बुद्धिमत्ता और काबिलियत से पहचान बनाने वाले युवा भारतीय शतरंज खिलाड़ी डी गुकेश ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमला मंदिर में आशीर्वाद लिया। अपनी सादगी और परंपराओं के प्रति आस्था दिखाते हुए उन्होंने मंदिर की रस्मों में हिस्सा लिया और सिर मुंडवाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। ये घटना सिर्फ उनकी धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि उनके गहरे संस्कारों को भी दर्शाती है।

कैसे बना सबसे कम उम्र में विश्व चैंपियन?

डी गुकेश ने शतरंज की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया है, वह किसी सपने से कम नहीं। 2024 में सिंगापुर में हुए विश्व शतरंज चैंपियनशिप में उन्होंने चीन के दिग्गज खिलाड़ी डिंग लिरेन को हराकर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ 18 साल की उम्र में गुकेश सबसे कम उम्र में विश्व शतरंज चैंपियन बनने वाले खिलाड़ी बन गए।

FIDE रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन

इस ऐतिहासिक जीत के बाद गुकेश ने FIDE (फिडे) रैंकिंग में तीसरा स्थान हासिल किया, जो उनके करियर का अब तक का सर्वोच्च रैंक है। इसने उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन शतरंज खिलाड़ियों की सूची में एक मजबूत जगह दिलाई।

आने वाले सालों पर गुकेश की नज़र

मंदिर में दर्शन के दौरान गुकेश ने अपनी हालिया उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा, "मुझे अपनी मेहनत जारी रखनी होगी। 2025 में कई अहम टूर्नामेंट्स होने वाले हैं, और मैं उसी पर फोकस कर रहा हूं। मैं हर फॉर्मेट में सुधार करना चाहता हूं और भगवान की कृपा से उम्मीद है कि भविष्य में अच्छी चीजें होंगी।"

संघर्ष, समर्पण और परिवार का साथ

डी गुकेश की सफलता सिर्फ उनकी प्रतिभा की कहानी नहीं है, बल्कि उनके परिवार के समर्थन और त्याग की भी मिसाल है। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए गुकेश ने अपनी विश्व चैंपियनशिप का खिताब अपने माता-पिता रजनीकांत और पद्मकुमारी को समर्पित किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनके माता-पिता ने वित्तीय संघर्षों के बावजूद उनके सपनों को पूरा करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की।

डी गुकेश की यात्रा हमें सिखाती है कि सच्ची मेहनत, समर्पण और परिवार के समर्थन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। अपने खेल के साथ-साथ अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहकर उन्होंने जो मिसाल पेश की है, वह वाकई काबिले तारीफ है। अब सबकी नजरें 2025 के टूर्नामेंट्स पर हैं, जहां ये युवा चैंपियन एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है।

 

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