Last Updated Feb - 21 - 2026, 03:53 PM | Source : Fela News
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका ने 10% ग्लोबल टैरिफ लागू किया। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि भारत पर फिलहाल कानूनी रूप से यही दर लागू मानी जाएगी।
अमेरिका में टैरिफ को लेकर जारी कानूनी विवाद के बीच बड़ा बदलाव सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले लगाए गए व्यापक टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया था, जिसके बाद नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी क्रम में सभी देशों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू किए जाने की घोषणा की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर शांति काल में राष्ट्रपति को व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। इस फैसले के बाद पहले लागू पारस्परिक टैरिफ का कानूनी आधार कमजोर हो गया। भारत पर लागू 18 प्रतिशत टैरिफ को लेकर भी इसी कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
बताया जा रहा है कि अदालत के फैसले के बाद यदि पुराने पारस्परिक टैरिफ हटते हैं, तो भारत पर सामान्य परिस्थितियों में शुल्क काफी कम रह सकता था। हालांकि दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 का उपयोग करते हुए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया, जो रद्द किए गए टैरिफ की जगह लेगा। इस अतिरिक्त शुल्क को जोड़ने पर भारत पर प्रभावी अमेरिकी टैरिफ लगभग 13.5 प्रतिशत के आसपास पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
इस बीच ट्रंप ने बयान दिया कि भारत के साथ पहले से तय व्यापार समझौते के अनुसार टैरिफ 18 प्रतिशत ही रहेगा। वहीं दूसरी ओर व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि कानूनी स्थिति के मुताबिक फिलहाल भारत पर 10 प्रतिशत टैरिफ ही लागू माना जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, धारा 122 के तहत राष्ट्रपति को सीमित अवधि के लिए शुल्क लगाने का अधिकार मिलता है, जो लगभग 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है। इसके बाद आगे की कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।
वहीं प्रशासन का कहना है कि नए कानूनी विकल्पों के जरिए टैरिफ नीति को जारी रखा जा सकता है और आने वाले समय में अन्य देशों के लिए अलग दरें तय करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
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