Last Updated Feb - 21 - 2026, 05:02 PM | Source : Fela News
अमेरिका की कथित रणनीति और ईरान की जमीनी हकीकत को लेकर चर्चा तेज। क्या वेनेजुएला जैसा मॉडल ईरान में संभव है, इसी पर ग्राउंड रिपोर्ट।
ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, खासकर उस संदर्भ में जब अमेरिका की रणनीतियों की तुलना वेनेजुएला से की जा रही है। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, सवाल यह है कि ईरान की जनता खुद बदलाव चाहती है या बाहरी दबाव की कोशिशें ज्यादा प्रभावी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति को लेकर विश्लेषकों के बीच यह बहस चल रही है कि क्या वेनेजुएला जैसा दबाव मॉडल ईरान पर लागू किया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों की राजनीतिक संरचना और सामाजिक परिस्थितियां काफी अलग हैं, इसलिए समान रणनीति सफल होना आसान नहीं होगा।
बताया जा रहा है कि ईरान में समय-समय पर विरोध प्रदर्शन और आर्थिक असंतोष देखने को मिलता रहा है, लेकिन सत्ता संरचना अभी भी मजबूत मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर, बाहरी हस्तक्षेप की संभावना पर भी सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि ईरान का राजनीतिक और सैन्य ढांचा वेनेजुएला से अलग और अधिक जटिल माना जाता है।
इस बीच कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव, प्रतिबंध और राजनीतिक बयानबाजी से माहौल जरूर प्रभावित होता है, लेकिन इससे सीधे सत्ता परिवर्तन होना तय नहीं माना जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की आंतरिक राजनीति में धार्मिक नेतृत्व, सुरक्षा संस्थानों और वैचारिक समर्थन का महत्वपूर्ण योगदान है, जो व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में भूमिका निभाता है।
वहीं दूसरी ओर, ईरान में असंतोष की आवाजें भी मौजूद हैं और कुछ वर्ग राजनीतिक बदलाव की मांग करते रहे हैं। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि विदेशी हस्तक्षेप का मुद्दा वहां राष्ट्रीय भावना को प्रभावित कर सकता है और कई बार बाहरी दबाव के खिलाफ एकजुटता भी पैदा होती है।
कुल मिलाकर ग्राउंड रिपोर्ट यह संकेत देती है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन का सवाल केवल अमेरिका या बाहरी रणनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की आंतरिक सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियां भी इसमें निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
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