Last Updated Feb - 21 - 2026, 05:41 PM | Source : Fela News
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द किए जाने के बाद कुछ शुल्कों पर रिफंड की संभावना बनी। यूएस चैंबर ने बताया किन आयातकों को पैसा मिल सकता है, प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं।
अमेरिका के शीर्ष व्यापार संगठन यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसले को रद्द किए जाने के बाद भारत और ब्राजील से आयातित कुछ वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क की वापसी की संभावना बन सकती है। रिपोर्ट के अनुसार यह राहत केवल कुछ खास परिस्थितियों में ही उपलब्ध होगी।
बताया जा रहा है कि रिफंड उन्हीं कंपनियों या संस्थाओं को मिल सकता है जिन्होंने सीधे तौर पर टैरिफ का भुगतान किया था। यानी अमेरिका में “इंपोर्टर ऑफ रिकॉर्ड” या वह पक्ष जो कस्टम क्लियरेंस के बाद माल का स्वामित्व लेता है, वही पात्र होगा। वहीं जिन व्यवसायों ने सीधे शुल्क का भुगतान नहीं किया, वे रिफंड के लिए पात्र नहीं होंगे।
यूएस चैंबर ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि रिफंड केवल उन टैरिफ पर उपलब्ध होगा जो इंटरनेशनल इकोनॉमिक इमरजेंसी पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए थे। इसमें तथाकथित “फेंटानिल”, “ट्रैफिकिंग”, “रिसिप्रोकल” या “बेसलाइन” टैरिफ शामिल हैं, साथ ही भारत और ब्राजील से आने वाले कुछ सामानों पर लगाए गए शुल्क भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि सेक्शन 232, सेक्शन 301, सेक्शन 201, एंटी-डंपिंग, काउंटरवेलिंग ड्यूटी या मोस्ट-फेवर्ड-नेशन टैरिफ जैसे शुल्कों पर रिफंड उपलब्ध नहीं होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ और रूस से तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया था। बाद में पारस्परिक टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया गया, जबकि रूसी तेल खरीद से जुड़े 25 प्रतिशत शुल्क हटाए गए थे। यह कदम भारत द्वारा रूस से ऊर्जा आयात कम करने और अमेरिकी ऊर्जा खरीद बढ़ाने की प्रतिबद्धता के बाद उठाया गया बताया गया।
इस बीच यूएस चैंबर के अधिकारियों का कहना है कि रिफंड प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में अदालत और प्रशासन की ओर से अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद जताई गई है। संगठन ने यह भी कहा कि अवैध घोषित टैरिफ की त्वरित वापसी अमेरिका के छोटे आयातकों के लिए राहत साबित हो सकती है और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती दे सकती है।
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