Last Updated Feb - 05 - 2026, 11:49 AM | Source : Fela News
क्षेत्रीय तनाव और कड़े बयानों के बीच अमेरिका व ईरान शुक्रवार को मस्कट में परमाणु मुद्दे पर बातचीत करेंगे। मिसाइल, प्रतिबंध और सुरक्षा चिंताएं वार्ता पर छाई रहीं
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तीखे बयानों के बीच अमेरिका और ईरान एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटने को तैयार हैं। जो वार्ता कुछ दिन पहले तक रद्द होने की कगार पर दिखाई दे रही थी, वह अब ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार सुबह आयोजित होगी। पहले इस बैठक को तुर्किये में कराने की योजना थी, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों के बाद स्थान बदलकर मस्कट कर दिया गया।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुष्टि की कि परमाणु मुद्दे पर अमेरिका के साथ बैठक मस्कट में होगी। उन्होंने इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ओमान का आभार भी जताया। अमेरिकी अधिकारियों ने भी वार्ता होने की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया है कि बातचीत आसान नहीं होगी।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत की है और ईरान को कड़े संदेश दिए हैं। दूसरी ओर, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता या क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों को वार्ता के दायरे में शामिल करने के पक्ष में नहीं है। ईरान का जोर केवल इस बात पर है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अपने देश में यूरेनियम संवर्धन का अधिकार बनाए रखना चाहता है।
अमेरिका का रुख इससे अलग है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अगर बातचीत से ठोस परिणाम चाहिए तो मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय गतिविधियां, प्रतिबंध और सुरक्षा चिंताओं जैसे मुद्दों पर भी चर्चा आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि व्यापक मुद्दों को शामिल किए बिना स्थायी समाधान मुश्किल होगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान के नेतृत्व को स्थिति की गंभीरता समझनी चाहिए। वहीं, अरब और मुस्लिम देशों ने वॉशिंगटन से अपील की है कि वह कूटनीतिक रास्ता खुला रखे। इन अपीलों ने दोनों पक्षों को फिर से संवाद की ओर लौटने में भूमिका निभाई है।
ईरान ने यह भी दोहराया है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने के लिए तैयार नहीं है। रूस ने इस संदर्भ में पहले जो प्रस्ताव दिया था — यूरेनियम को अपने यहां सुरक्षित रखने का वह अभी भी चर्चा में है, लेकिन इस पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मस्कट की यह बैठक निर्णायक तो नहीं, लेकिन दिशा तय करने वाली जरूर हो सकती है। ओमान पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और उसे एक भरोसेमंद संवाद स्थल माना जाता है। यदि बातचीत सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ती है, तो आगे की बैठकों के लिए रास्ता खुल सकता है।
कुल मिलाकर, जंग जैसे हालात के साए में होने जा रही यह वार्ता कूटनीति की परीक्षा है। दोनों देशों के लिए यह अवसर है कि वे तनाव कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा को मजबूती मिल सके।
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