Last Updated Nov - 12 - 2025, 03:12 PM | Source : Fela News
दिल्ली में हुए धमाके पर दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं आईं, लेकिन हैरानी तब हुई जब इस्लामाबाद और अंकारा ने चुप्पी साध ली। भारत ने इसे शर्मनाक बताया।
दिल्ली धमाके ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और उसके साथी तुर्की का रवैया देखकर हैरानी हुई। जहां भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस हमले की जांच में जुटी हैं, वहीं पाकिस्तान ने इसे “सिर्फ गैस सिलेंडर ब्लास्ट” करार देकर मामले को हल्का दिखाने की कोशिश की। तुर्की ने भी इस बयान का समर्थन कर अपनी वही पुरानी दोहरी नीति एक बार फिर सामने ला दी।
दरअसल, दिल्ली में हुए इस धमाके में अब तक कई तकनीकी सबूत मिल चुके हैं, जिनसे साफ है कि यह एक योजनाबद्ध आतंकी हमला था। जांच में विस्फोटक सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और रिमोट डिटोनेटर जैसे सबूत बरामद हुए हैं। बावजूद इसके, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि “भारत को जल्दबाजी में किसी को दोष नहीं देना चाहिए” और धमाके को घरेलू दुर्घटना बताने की कोशिश की।
भारत के खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस बयान के पीछे का मकसद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद से जुड़े पाकिस्तानी नेटवर्क से ध्यान हटाना है। दिल्ली हमले में कई सुराग ऐसे हैं जिनकी कड़ियां सीमा पार सक्रिय आतंकी संगठनों तक पहुंच सकती हैं, और यही वजह है कि इस्लामाबाद इस पूरे मामले को “नैरेटिव कंट्रोल” करने की कोशिश कर रहा है।
तुर्की का रुख भी कुछ ऐसा ही रहा। उसने पाकिस्तान के बयान का समर्थन करते हुए घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण हादसा” कहा, जबकि वही तुर्की किसी पश्चिमी देश में हुई छोटी सी घटना पर भी आतंकवाद के खिलाफ बयान जारी करता है।
भारत में राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह डबल स्टैंडर्ड अब पुराना खेल बन चुका है —जब भी आतंक की सच्चाई पाकिस्तान के करीब पहुंचती है, तो उसके समर्थक देश मामले को “दुर्घटना” करार दे देते हैं।
लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। भारत की एजेंसियां सबूतों के साथ जवाब देने की तैयारी में हैं। और दुनिया अब यह साफ देख रही है कि दिल्ली में हुआ धमाका सिर्फ एक आतंकी वारदात नहीं, बल्कि उन चेहरों का पर्दाफाश है जो हमेशा आतंक को “दुर्घटना” बनाकर बचाने की कोशिश करते हैं।
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