Last Updated May - 20 - 2025, 02:46 PM | Source : Fela News
चीन और रूस ने मिलकर चंद्रमा पर एक स्वचालित परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है, जो उनके संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (ILRS) को ऊर
चीन और रूस ने एक संयुक्त परियोजना के तहत चंद्रमा पर एक स्वचालित परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है। इस संयंत्र का उद्देश्य उनके संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (International Lunar Research Station - ILRS) को ऊर्जा प्रदान करना है। यह परियोजना 2036 तक पूर्ण रूप से संचालित होने की उम्मीद है।
ILRS परियोजना का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास एक स्थायी मानवयुक्त चंद्र आधार स्थापित करना है। इस आधार में एक कमांड सेंटर, संचार हब, वैज्ञानिक अनुसंधान सुविधाएं और एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल होंगे। इस संयंत्र का निर्माण स्वचालित रूप से रोबोटिक तकनीकों की सहायता से किया जाएगा, जिससे यह चंद्रमा पर मानव उपस्थिति के बिना भी संचालित हो सकेगा।
चीन की योजना 2028 में चांग'ई-8 मिशन के माध्यम से चंद्रमा पर पहला मानवयुक्त लैंडिंग करने की है, जो ILRS के निर्माण की नींव रखेगा। इसके बाद 2035 तक कई भारी रॉकेट लॉन्च करके आधार के विभिन्न घटकों को चंद्रमा पर भेजा जाएगा।
इस परियोजना में भारत की भी भागीदारी की संभावना है। रूस की राज्य परमाणु ऊर्जा निगम रोसाटॉम के नेतृत्व में, यह परियोजना चंद्र आधार संचालन के लिए आधा मेगावाट तक ऊर्जा उत्पन्न करने की योजना बना रही है। भारत की भागीदारी इसके 2040 तक मानवयुक्त चंद्र मिशन की योजना के अनुरूप है।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि वहां पर जल बर्फ और हीलियम-3 जैसे मूल्यवान संसाधनों की उपस्थिति की संभावना है, जो दीर्घकालिक मानव उपस्थिति और ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि, इस परियोजना को लेकर कुछ अंतरराष्ट्रीय चिंताएं भी हैं। पूर्व नासा प्रशासक बिल नेल्सन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि चीन चंद्रमा पर क्षेत्रीय दावे कर सकता है, जैसा कि उसने दक्षिण चीन सागर में किया है। हालांकि, चीन ने इन दावों का खंडन किया है और कहा है कि ILRS अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान का समर्थन करेगा।
चीन ने पहले ही 17 देशों को ILRS में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, जिनमें मिस्र, वेनेजुएला, दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान शामिल हैं। यह परियोजना चंद्र अन्वेषण में बदलते वैश्विक समीकरणों को दर्शाती है, खासकर जब अमेरिका की नासा की योजनाएं बजट कटौती के कारण अनिश्चितता का सामना कर रही हैं।
इस प्रकार, चीन और रूस की यह संयुक्त पहल चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा को प्रभावित कर सकती है।