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ट्रम्प को कोलंबिया राष्ट्रपति की खुली चुनौती, लैटिन अमेरिका में हलचल

ट्रम्प को कोलंबिया राष्ट्रपति की खुली चुनौती, लैटिन अमेरिका में हलचल

Last Updated Jan - 07 - 2026, 05:10 PM | Source : Fela News

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने डोनाल्ड ट्रम्प को चुनौती देते हुए कहा कि हिम्मत है तो उन्हें गिरफ्तार करें, जिससे अमेरिका-लैटिन अमेरिका तनाव बढ़ गया।
ट्रम्प को कोलंबिया राष्ट्रपति की खुली चुनौती
ट्रम्प को कोलंबिया राष्ट्रपति की खुली चुनौती

लैटिन अमेरिका और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर जबरदस्त तनाव देखने को मिल रहा है। कोलंबिया के राष्ट्रपति Gustavo Petro ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर उनमें हिम्मत है, तो उन्हें गिरफ्तार करके दिखाएं। पेट्रो का यह बयान पूरे क्षेत्र में सियासी हलचल का कारण बन गया है।

यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolas Maduro को लेकर सख्त कदम उठाए जाने के बाद वॉशिंगटन और लैटिन अमेरिकी देशों के रिश्ते और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। पेट्रो ने साफ शब्दों में कहा कि वह कोलंबिया में ही मौजूद हैं और अमेरिका का इंतजार कर रहे हैं। उनके इस बयान को अमेरिका की नीतियों के खिलाफ खुली बगावत के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पेट्रो का यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि लैटिन अमेरिका में बढ़ती अमेरिका-विरोधी भावना को भी दर्शाता है। पेट्रो पहले भी अमेरिकी नीतियों की आलोचना करते रहे हैं, खासकर ड्रग वॉर, सैन्य दखल और क्षेत्रीय राजनीति में हस्तक्षेप को लेकर ।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी लैटिन अमेरिकी नेता ने इस तरह की चुनौती दी हो। अगस्त 2025 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने भी डोनाल्ड ट्रम्प को इसी तरह की चुनौती दी थी। मादुरो ने कहा था कि अगर अमेरिका में हिम्मत है, तो वह वेनेजुएला आकर उन्हें गिरफ्तार करे। उस बयान के बाद अमेरिका ने मादुरो की गिरफ्तारी पर घोषित इनाम की राशि और बढ़ा दी थी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया।

पेट्रो के ताजा बयान के बाद कोलंबिया और अमेरिका के रिश्तों पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, कोलंबिया पारंपरिक रूप से अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है, लेकिन पेट्रो के सत्ता में आने के बाद उसकी विदेश नीति में बदलाव के संकेत लगातार मिल रहे हैं। वे क्षेत्रीय स्वायत्तता और लैटिन अमेरिकी एकजुटता पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से अमेरिका और लैटिन अमेरिका के बीच कूटनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। साथ ही, यह बयान क्षेत्रीय राजनीति में नए ध्रुवीकरण की ओर इशारा करता है, जहां कई देश खुलकर अमेरिकी दबाव का विरोध करते नजर आ रहे हैं।

कुल मिलाकर, गुस्तावो पेट्रो की ट्रम्प को दी गई यह चुनौती सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि अमेरिका- लैटिन अमेरिका संबंधों में बढ़ते तनाव की एक और कड़ी बन गई है, जिसके असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर साफ दिखाई दे सकते हैं। 

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