Last Updated Feb - 03 - 2026, 06:08 PM | Source : Fela News
अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन के फैसले पर रोक लगाई, जिससे 3.5 लाख हैती नागरिकों का टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस फिलहाल बरकरार रहा और निर्वासन टल गया.
अमेरिका में रह रहे करीब साढ़े तीन लाख हैती नागरिकों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। वॉशिंगटन डी.सी. की एक फेडरल अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले पर आखिरी वक्त पर रोक लगा दी, जिसके तहत हैती के नागरिकों को मिला टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) खत्म किया जाना था । यदि यह आदेश लागू हो जाता, तो हजारों लोगों को ऐसे देश वापस भेजा जा सकता था, जो इस समय गंभीर हिंसा, अराजकता और मानवीय संकट से जूझ रहा है।
यूएस डिस्ट्रिक्ट जज एना रेयेस ने गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के उस आदेश पर रोक लगाई, जो कुछ ही दिनों में प्रभावी होने वाला था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस निर्णय की प्रक्रिया में गंभीर कानूनी खामियां दिखाई देती हैं और इसमें नस्लीय भेदभाव की आशंका भी नजर आती है। जज ने यह भी कहा कि सरकार ने उचित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया और संविधान के तहत समान संरक्षण के अधिकार का सम्मान नहीं किया गया।
TPS यानी टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस एक मानवीय सुरक्षा प्रावधान है, जो उन देशों के नागरिकों को दिया जाता है, जहां युद्ध, प्राकृतिक आपदा या असाधारण संकट की स्थिति हो । हैती को यह दर्जा 2010 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद दिया गया था। इसके बाद से अमेरिका ने समय-समय पर इसे बढ़ाया। जुलाई 2024 में बाइडन प्रशासन ने हैती की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए TPS को फरवरी 2026 तक बढ़ा दिया था।
लेकिन जनवरी 2025 में सत्ता में वापसी के बाद ट्रंप प्रशासन ने इस व्यवस्था की समीक्षा शुरू की। गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने पहले TPS की अवधि घटाने और फिर इसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए। प्रशासन का तर्क था कि TPS अस्थायी प्रावधान है और इसे अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता।
हैती नागरिकों की ओर से दायर एक क्लास- एक्शन याचिका के बाद यह मामला अदालत पहुंचा। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि हैती की स्थिति अब भी इतनी खराब है कि वहां लोगों को वापस भेजना उनकी जान जोखिम में डालने जैसा होगा।
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के अनुसार, हैती में इस समय गैंग हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है। लगभग 60 लाख लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की है।
जज रेयेस ने अपने फैसले में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन ने पहले से ही TPS खत्म करने का मन बना लिया था और यह निर्णय तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा के बजाय पूर्वाग्रह से प्रेरित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक नीति का नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का भी है।
इस आदेश के बाद फिलहाल हैती के TPS धारकों को राहत मिली है। वे अमेरिका में रहकर काम कर सकते हैं और निर्वासन का खतरा टल गया है। हालांकि, माना जा रहा है कि सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है, जिससे यह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रह सकती है।
यह मामला अमेरिकी इमिग्रेशन नीति, मानवीय जिम्मेदारी और संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। फिलहाल अदालत का यह आदेश हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण साबित हुआ है।
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