Last Updated Dec - 16 - 2025, 05:52 PM | Source : Fela News
सऊदी अरब में एक बार फिर सख्त सजा व्यवस्था ने दुनिया का ध्यान खींचा है। पवित्र शहर मक्का में एक साथ तीन लोगों को फांसी दिए जाने के बाद मानवाधिकारों को लेकर बहस त
सऊदी अरब ने मक्का में एक ही दिन में तीन लोगों को फांसी देकर अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। सरकारी बयान के मुताबिक इन लोगों को गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद शरिया कानून के तहत उन्हें मौत की सजा दी गई। इस कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या सऊदी अरब फांसी देने के मामलों में और सख्ती अपना रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2024 में सऊदी अरब में फांसी की संख्या पहले ही काफी ज्यादा रही है। अब मक्का जैसे पवित्र शहर में एक साथ तीन लोगों को मौत के घाट उतारने की घटना ने मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि सऊदी अरब में पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं।
सऊदी सरकार का तर्क है कि कड़ी सजा से अपराध पर लगाम लगती है और देश की सुरक्षा बनी रहती है। सरकार का दावा है कि जिन मामलों में फांसी दी जाती है, उनमें पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। वहीं आलोचकों का कहना है कि कई मामलों में आरोपियों को पर्याप्त कानूनी मदद नहीं मिल पाती।
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब एक तरफ खुद को आधुनिक और सुधारवादी देश के रूप में पेश कर रहा है, तो दूसरी तरफ फांसी की बढ़ती संख्या इस छवि पर सवाल खड़े कर रही है। पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों ने सऊदी अरब से इस सजा प्रणाली पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
फिलहाल मक्का में हुई इस फांसी की घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि अपराध और सजा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले समय में सऊदी अरब की नीतियों पर वैश्विक दबाव और बढ़ सकता है।