Last Updated Sep - 17 - 2025, 12:40 PM | Source : Fela News
भारत ने कभी आधिकारिक तौर पर अमेरिकी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका ने भारत-पाक संबंधों में संवाद बढ़ाने की कोशिशें की थीं।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के हालिया बयान ने डोनाल्ड ट्रंप के पुराने दावे की पोल खोल दी है। डार ने खुद स्वीकार किया कि कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका ने मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था, लेकिन भारत ने इसे सख्ती से ठुकरा दिया था।
दरअसल, ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कहा था कि भारत ने उनसे मध्यस्थता की गुजारिश की थी। इस बयान पर उस समय काफी विवाद हुआ था और भारत ने साफ शब्दों में कहा था कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है, इसमें किसी तीसरे देश की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं होगी।
अब पाकिस्तान के कुबूलनामे से यह साफ हो गया है कि भारत ने कभी भी अमेरिकी मध्यस्थता को मंजूरी नहीं दी। यह खुलासा न केवल ट्रंप के दावे को झूठा साबित करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत ने अपने रुख पर हमेशा मजबूती से कायम रहते हुए कश्मीर पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को नकारा है।