Last Updated Mar - 28 - 2026, 05:12 PM | Source : Fela News
यमन से इजराइल पर हुए मिसाइल हमले के बाद अमेरिका-इजराइल-ईरान तनाव बढ़ गया है। बाब अल-मंदेब बंद होने की आशंका से वैश्विक व्यापार और स्वेज नहर मार्ग पर संकट गहराने का खतरा है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और गहराता नजर आ रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे टकराव में अब यमन के हूती विद्रोहियों की एंट्री ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इजराइली सेना ने जानकारी दी है कि उसने यमन से दागी गई एक मिसाइल की पहचान की है। यह मौजूदा संघर्ष के दौरान पहली बार है जब यमन की ओर से सीधे मिसाइल हमला किया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला ऐसे समय में हुआ जब एक दिन पहले ही ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही, तो वे भी जवाबी कदम उठाएंगे। हालांकि उन्होंने अपनी रणनीति स्पष्ट नहीं की थी, लेकिन अब मिसाइल हमले के बाद उनकी सक्रिय भागीदारी साफ दिखाई दे रही है। खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि हूती विद्रोहियों ने इजराइल के परमाणु ठिकाने डिमोना को निशाना बनाने की कोशिश की।
हूती विद्रोहियों का इस संघर्ष में शामिल होना क्षेत्रीय तनाव को बड़े स्तर पर बढ़ा सकता है। इन लड़ाकों के पास लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता है और वे पहले भी लाल सागर और आसपास के समुद्री इलाकों में जहाजों को निशाना बना चुके हैं। 7 अक्टूबर 2023 के बाद गाजा में हमास के समर्थन में उन्होंने इजराइली और अमेरिकी जहाजों की आवाजाही को बाधित किया था।
अब सबसे बड़ी चिंता समुद्री रास्तों को लेकर बढ़ रही है। लेबनान और इराक में मौजूद ईरान समर्थित गुट पहले ही इस संघर्ष में शामिल हैं, और अब हूती विद्रोहियों की एंट्री के बाद बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर खतरा मंडराने लगा है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जो यमन को जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है।
बाब अल-मंदेब रेड सी को अदन की खाड़ी और आगे भारतीय महासागर से जोड़ता है। यही रास्ता स्वेज नहर तक पहुंचने का मुख्य मार्ग है, जिसके जरिए यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच व्यापार होता है। दुनिया का लगभग 10 से 15 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है।
पहले ही ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बना हुआ है। अगर बाब अल-मंदेब भी प्रभावित होता है, तो वैश्विक व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ेगा। तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही सप्लाई चेन पर भी बड़ा दबाव पड़ेगा, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है।
कुल मिलाकर, हूती विद्रोहियों की इस एंट्री ने मिडिल ईस्ट के संघर्ष को और जटिल बना दिया है। अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे, तो यह टकराव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं।
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