Last Updated Mar - 19 - 2026, 06:25 PM | Source : Fela news
Iran War: ईरान ने मिडिल ईस्ट के तेल और गैस ठिकानों पर हमला कर वैश्विक सप्लाई चेन में तनाव बढ़ाया है. इस संघर्ष से महंगाई में उछाल आया है और भारत में भी तेल-गैस की कीमतों पर असर दिख सकता है.
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ते ही ईरान ने रणनीति बदल दी है, जिससे असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। इजरायल के साथ जारी संघर्ष में ईरान ने सीधे सैन्य ठिकानों के बजाय तेल और गैस सप्लाई से जुड़े महत्वपूर्ण प्लांट्स को निशाना बनाया।
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई का अहम हिस्सा है। इसके अलावा कतर में स्थित रस लाफान इंडस्ट्रीज शहर पर हमला किया गया, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस केंद्र माना जाता है। यहां से दुनिया की करीब 20 फीसदी गैस सप्लाई होती है। हमले में कई मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से कुछ रोकी गईं, लेकिन एक मिसाइल सीधे प्लांट पर लगी, जिससे बड़ा नुकसान हुआ। यहां मौजूद शेल का Pearl GTL प्लांट भी प्रभावित हुआ, जो गैस को तरल ईंधन में बदलता है।
संयुक्त अरब अमीरात में हबशान गैस कॉम्प्लेक्स भी बंद करना पड़ा। यह प्लांट रोजाना करीब 6.1 अरब क्यूबिक फीट गैस पैदा करता है और UAE की लगभग 60 फीसदी जरूरत पूरी करता है। इस गैस का इस्तेमाल बिजली बनाने, पानी साफ करने और उद्योगों में होता है। सऊदी अरब में भी हमले की कोशिश की गई। रियाद की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं और ड्रोन से पूर्वी इलाके की रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। यहां रस तनुरा जैसी बड़ी रिफाइनरी है, जो रोज करीब 5.5 लाख बैरल तेल प्रोसेस करती है और पेट्रोल, डीजल समेत ईंधन दुनिया के कई देशों तक भेजा जाता है।
इन हमलों के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। कच्चे तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। अमेरिका में डीजल की कीमत 5 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा हो गई, जो 2022 के बाद सबसे अधिक है। यूरोप में गैस की कीमतें करीब 70 फीसदी बढ़ गई हैं और एशिया में LNG की कीमतों में लगभग 88 फीसदी की वृद्धि हुई।
भारत अपनी गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है, इसलिए इसका असर यहां भी महसूस हो सकता है। कई देशों में गैस का स्टॉक केवल 9 से 11 दिन का बचा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी जगहों की स्थिति और भी गंभीर है।
ईरान ने जिन ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया, वे केवल स्थानीय प्लांट नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन के अहम हिस्से हैं। इस हमले का असर उद्योगों, सरकारों और आम लोगों तक पहुंचता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगाई और बढ़ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ सकता है।
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