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ईरान में उबाल: तेहरान से मशहद तक सड़कों पर गूंजा विरोध

ईरान में उबाल: तेहरान से मशहद तक सड़कों पर गूंजा विरोध

Last Updated Jan - 09 - 2026, 11:04 AM | Source : Fela News

तेहरान समेत ईरान के कई शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज, 'शाह ज़िंदाबाद' के नारे लगे। हालात बिगड़ते देख देशभर में इंटरनेट बंद किया गया।
तेहरान से मशहद तक सड़कों पर गूंजा विरोध
तेहरान से मशहद तक सड़कों पर गूंजा विरोध

ईरान में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक तनाव खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। राजधानी Tehran समेत देश के कई बड़े शहरों से सामने आए वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि बड़ी संख्या में लोग मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

इन प्रदर्शनों के दौरान कुछ इलाकों में 'शाह ज़िंदाबाद' जैसे नारे भी सुनाई दिए, जिसने पूरे देश में सियासी हलचल तेज कर दी है।

गुरुवार शाम तेहरान के कई हिस्सों में लोग शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे। हाथों में नारे लिखी तख्तियां और मोबाइल कैमरों के साथ प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। शुरुआती घंटों में इन प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने नहीं रोका, जिससे लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती चली गई। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा मुख्य रूप से आर्थिक हालात, सामाजिक पाबंदियों और अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर बताया जा रहा है।

राजधानी के अलावा ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर Mashhad से भी ऐसे ही दृश्य सामने आए हैं। यहां भी सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और सत्ता के खिलाफ नारे लगाए। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, बीते कई वर्षों में यह पहली बार है जब धार्मिक सत्ता के विरोध में इतने खुले तौर पर और इतने बड़े पैमाने पर लोग सामने आए हैं।

प्रदर्शन जैसे-जैसे फैलने लगे, प्रशासन की चिंता भी बढ़ती चली गई। एक मॉनिटरिंग ग्रुप के अनुसार, हालात को काबू में रखने के लिए पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। इससे सोशल मीडिया पर वीडियो और सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाने की कोशिश की गई। इंटरनेट बंद होने से आम लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन प्रदर्शनों में 'शाह ज़िंदाबाद' जैसे नारों का सुनाई देना बेहद अहम संकेत है। 1979 की क्रांति के बाद ईरान में ऐसे नारे सार्वजनिक रूप से बहुत कम देखने को मिले हैं। यह मौजूदा शासन के प्रति गहरे असंतोष और जनता के भीतर बढ़ते गुस्से को दर्शाता है।

फिलहाल ईरानी सरकार की ओर से इन प्रदर्शनों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इंटरनेट बंद करना और सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता यह बताती है कि प्रशासन स्थिति को गंभीरता से ले रहा है।

कुल मिलाकर, तेहरान से लेकर मशहद तक सड़कों पर दिखाई दे रहा यह जनाक्रोश ईरान के राजनीतिक भविष्य के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और सरकार इसका क्या जवाब देती है।

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