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युद्ध में ईरान की ऐतिहासिक धरोहरें तबाह, जानिए इन बेशकीमती स्थलों का महत्व और इतिहास

युद्ध में ईरान की ऐतिहासिक धरोहरें तबाह, जानिए इन बेशकीमती स्थलों का महत्व और इतिहास

Last Updated Mar - 14 - 2026, 02:57 PM | Source : Fela News

Iran UNESCO Sites Damaged: प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों पर हो रहे हमलों से सिर्फ ईरान और लेबनान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में निराशा और चिंता का माहौल है।
युद्ध में ईरान की ऐतिहासिक धरोहरें तबाह
युद्ध में ईरान की ऐतिहासिक धरोहरें तबाह

ईरान में जारी युद्ध के बीच कई ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इन हमलों से सिर्फ ईरान या लेबनान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में चिंता और निराशा का माहौल है। ये धरोहरें मानव इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा मानी जाती हैं, इसलिए इनके नुकसान को वैश्विक क्षति के रूप में देखा जा रहा है।

गोलेस्तान पैलेस, तेहरान

तेहरान का गोलेस्तान पैलेस ईरान की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। हालिया हवाई हमलों के बाद सामने आई तस्वीरों में इस महल को नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। बताया गया कि पास में हुए धमाके की तेज लहर के कारण महल के मशहूर ‘हॉल ऑफ मिरर्स’ की छत और दीवारों पर लगे बारीक कांच टूटकर गिर गए।

गोलेस्तान पैलेस 16वीं से 19वीं शताब्दी के बीच बना शाही परिसर है, जो काजर राजवंश की कला और स्थापत्य का प्रमुख उदाहरण माना जाता है। यहां फारसी और यूरोपीय वास्तुकला का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। यूनेस्को ने इसे 2013 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

चेहेल सोतौन पैलेस, इस्फहान

इस्फहान शहर को ‘आधा जहां’ कहा जाता है, क्योंकि यहां कई ऐतिहासिक और खूबसूरत इमारतें मौजूद हैं। इसी शहर का चेहेल सोतौन पैलेस भी हमलों की चपेट में आने की खबर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 17वीं सदी के इस महल के लकड़ी के खंभों और दरवाजों को नुकसान पहुंचा है।

इस महल का निर्माण सफवी राजवंश के शासक शाह अब्बास द्वितीय ने करवाया था। महल के सामने बने तालाब में इसके 20 स्तंभों की परछाईं पड़ने पर वे 40 दिखाई देते हैं, इसलिए इसे ‘चेहेल सोतौन’ यानी ‘40 स्तंभ’ कहा जाता है।

जामे मस्जिद, इस्फहान

इस्फहान की जामे मस्जिद ईरान की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक मानी जाती है। खबरों के मुताबिक, हालिया हमलों में इसके गुंबद और नीली टाइलों से सजी दीवारों को नुकसान पहुंचा है।

करीब 1200 साल पुरानी यह मस्जिद इस्लामी वास्तुकला का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसके क्षतिग्रस्त होने को इतिहास के एक अहम हिस्से के नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।

फलक-ओल-अफलाक किला

पश्चिमी ईरान में स्थित फलक-ओल-अफलाक किला भी ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हालिया हमलों में किले के पास स्थित सांस्कृतिक धरोहर कार्यालय के पूरी तरह तबाह होने की खबर है।

इस किले का निर्माण तीसरी शताब्दी में सासानी काल के दौरान हुआ था। पत्थर, ईंट, मिट्टी और चूने से बना यह किला मानव सभ्यता के प्राचीन प्रमाणों में से एक माना जाता है। हाल ही में इसे यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचना केवल किसी एक देश का नुकसान नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता की सांस्कृतिक विरासत पर चोट है।

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