Last Updated Jan - 24 - 2026, 04:59 PM | Source : Fela News
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ने पर ईरान ने चेताया, किसी भी हमले को युद्ध माना जाएगा, जवाब बेहद कठोर होगा, ट्रंप के बयान से तनाव और गहराया।
मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती के बीच ईरान ने वॉशिंगटन को कड़ी और साफ चेतावनी दे दी है। ईरान का कहना है कि उस पर होने वाला कोई भी हमला, चाहे वह सीमित क्यों न हो, पूरी जंग माना जाएगा और उसका जवाब बेहद कठोर तरीके से दिया जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका अपने एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप समेत अतिरिक्त सैन्य संसाधन क्षेत्र में भेजने की तैयारी कर रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अमेरिका की मौजूदा सैन्य गतिविधियों को तेहरान बेहद गंभीरता से देख रहा है। अधिकारी ने कहा कि ईरान को उम्मीद है कि यह तैनाती किसी वास्तविक सैन्य टकराव के इरादे से नहीं की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद ईरानी सशस्त्र बल हर संभावित स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार और अलर्ट पर हैं।
ईरानी अधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस बार किसी भी तरह के हमले को अलग-अलग नाम देकर कमतर नहीं आंका जा सकता। चाहे उसे सर्जिकल स्ट्राइक कहा जाए या सीमित कार्रवाई, ईरान उसे सीधे युद्ध की घोषणा मानेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में जवाब इस तरह दिया जाएगा कि भविष्य में कोई भी देश ईरान पर हमला करने से पहले सौ बार सोचे।
इस चेतावनी से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त लहजे में बयान दिया था। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका का एक बड़ा सैन्य आर्माडा ईरान की दिशा में बढ़ रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह इसका इस्तेमाल न करने की उम्मीद करते हैं। ट्रंप ने ईरान को चेताया था कि वह न तो आंतरिक विरोध प्रदर्शनों को कुचले और न ही अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करे।
के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान की संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया, तो देश चुप नहीं बैठेगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान की जवाबी कार्रवाई किस रूप में होगी, लेकिन संकेत साफ हैं कि प्रतिक्रिया केवल कूटनीतिक नहीं होगी ।
ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि वर्षों से अमेरिकी सैन्य दबाव और प्रतिबंधों का सामना कर रहे देश के पास अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता। उनके मुताबिक, ईरान ने अपने संसाधनों और सैन्य रणनीति को सिर्फ बचाव और संतुलन बनाए रखने के लिए तैयार रखा है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने तनाव के दौरान मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई हो । अतीत में भी कई बार ऐसे कदमों को रक्षात्मक बताया गया, लेकिन कई मौकों पर इसके बाद हालात और बिगड़े हैं। पिछले साल ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े घटनाक्रम के दौरान भी इसी तरह का सैन्य जमावड़ा देखा गया था।
मौजूदा हालात में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर अस्थिरता की ओर धकेल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह चेतावनियां सिर्फ शब्दों तक सीमित रहती हैं या हालात किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ते हैं।
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