Last Updated Oct - 16 - 2025, 04:27 PM | Source : Fela News
सीमा पार रिश्ते फिर से तनाव में हैं। पाकिस्तान और तालिबान के बीच बढ़ता अविश्वास अब एक बार फिर जंग की शक्ल लेता दिख रहा है। सवाल यही है – क्या तालिबान इस धोखे को
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। कभी रणनीतिक सहयोगी, तो कभी दुश्मन की तरह आमने-सामने। लेकिन इस बार हालात कुछ और गंभीर लग रहे हैं। खबरें हैं कि पाकिस्तान ने आखिरी मिनट पर तालिबान को धोखा दिया है, जिससे अफगान सीमा पर तनाव बढ़ गया है। इस ‘धोखे’ की जड़ें उन समझौतों में हैं जिन्हें दोनों पक्षों ने हाल ही में सुरक्षा और सीमा नियंत्रण को लेकर तय किया था
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान इलाकों में हाल ही में हुए आतंकी हमलों के बाद इस्लामाबाद ने तालिबान पर कड़ा रुख अपनाया। पाकिस्तानी सेना का आरोप है कि ये हमले अफगानिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकियों ने किए। वहीं, तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान बिना सबूत के अफगान सरकार को दोषी ठहरा रहा है और अपने अंदरूनी असंतोष को छिपाने के लिए सीमा पर तनाव बढ़ा रहा है।
मामले को और पेचीदा तब बना दिया जब पाकिस्तान ने अपने सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें कई लोगों के मारे जाने की खबर है। तालिबान ने इसे सीधा "विश्वासघात" बताया और चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान ऐसे कदम उठाता रहा, तो अफगानिस्तान भी "जवाब देना जानता है"।
इस पूरे विवाद में दिलचस्प बात यह है कि कभी पाकिस्तान ने ही तालिबान को समर्थन दिया था। लेकिन अब वही तालिबान पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की दीवार इतनी मोटी हो चुकी है कि अब कोई भी वार्ता भरोसे पर नहीं टिक सकती।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात यूं ही बिगड़ते रहे, तो आने वाले हफ्तों में सीमा पर झड़पें तेज हो सकती हैं। और अगर तालिबान ने सच में पलटवार किया, तो ये पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
फिलहाल, इस पूरी कहानी में एक बात साफ है — इस बार की जंग सिर्फ सीमा की नहीं, भरोसे की भी है।