Header Image

नूर खान एयरबेस: पाकिस्तानी विशेषज्ञ का दावा — ‘अमेरिकी नियंत्रण में’

नूर खान एयरबेस: पाकिस्तानी विशेषज्ञ का दावा — ‘अमेरिकी नियंत्रण में’

Last Updated Jun - 07 - 2025, 11:16 AM | Source : Fela News

विशेषज्ञ इम्तियाज़ गुल ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस अमेरिका के नियंत्रण में है
नूर खान एयरबेस
नूर खान एयरबेस

पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक इम्तियाज़ गुल ने एक वीडियो में सनसनीखेज दावा किया है कि रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (पूर्व लियाकत खान एयरबेस) वास्तव में अमेरिकी नियंत्रण में है। गुल के अनुसार, इस एयरबेस तक पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी अभी तक सीमित पहुँच प्राप्त कर पाए हैं—जहां तक जाना जाता, कुछ सेक्टर केवल अमेरिकी कर्मियों द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं ।

बेस की रणनीतिक महत्ता काफी अधिक है—यह इस्लामाबाद से मात्र 10 किमी दूर स्थित है और पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय के नजदीक होने के कारण व्यावसायिक एवं सैन्य परिचालन का केंद्र समझा जाता है। इसे C‑130 और IL‑78 मालवाहक विमानों का प्रमुख ठिकाना भी माना जाता है, जो देश की लॉजिस्टिक एवं आपूर्ति श्रृंखला में अहम भूमिका निभाते हैं ।

इम्तियाज़ गुल ने यह आरोप ऐसे समय में लगाये हैं जब भारतीय वायुसेना की ऑपरेशन सिंडूर (7 मई) के तहत इस एयरबेस को निशाना बनाया गया था । उनकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी विमानों की नियमित आवाजाही से इन दावों को और बल मिला है ।

इन आरोपों ने पाकिस्तान और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग एवं संप्रभुता के प्रश्नों को हवा दी है। यह मामला दोनों देशों की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।

 अंतरराष्ट्रीय संदर्भ – यूएस की विश्वव्यापी सैन्य पहुंच

अमेरिका के पास विदेशी सैन्य ठिकानों की संख्या बहुत बड़ी है — 55 देशों में लगभग 128 ज्ञात स्थायी ठिकाने हैं, जिनमें जापान, दक्षिण कोरिया और कई मध्यपूर्वी व यूरोपीय देश शामिल हैं ।

जापान में अकेले 14, फिलीपींस में 9, और दक्षिण कोरिया में 8 अमेरिकी ठिकाने हैं ।

जब अमेरिका अपने ठिकानों को सीमित कर रहा है—जैसे कि सीरिया से —पर विदेशों में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बनी हुई है, जो स्थानीय सुरक्षा स्थिति और रणनीतिक हितों से जुड़ी है ।

इस व्यापक संदर्भ में, नूर खान एयरबेस को लेकर उठाए गए आरोप यह संकेत देते हैं कि वैश्विक सुरक्षा एवं सैन्य संधियाँ किस तरह से देशों की आंतरिक संप्रभुता पर सवाल खड़े कर सकती हैं। पाकिस्तान में इससे लेकर पारदर्शिता और समझौतों पर सार्वजनिक बहस तेज होने की उम्मीद है।

Share :

Trending this week

पाकिस्तान वार्ता फेल, ट्रंप बोले- ईरान की मुझे परवाह नहीं

Apr - 13 - 2026

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम शांति वार... Read More

फिर भी ट्रंप ने शहबाज-मुनीर की तारीफ

Apr - 13 - 2026

पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम शांति वार्... Read More

चीन ईरान को एयर डिफेंस देगा

Apr - 11 - 2026

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि चीन आने वाल... Read More