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ऑपरेशन ‘सिंदूर’ पर पाकिस्तान का कबूलनामा: नूर खान एयरबेस पर भारत के मिसाइल हमले की शहबाज़ शरीफ़ ने मानी बात

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ पर पाकिस्तान का कबूलनामा: नूर खान एयरबेस पर भारत के मिसाइल हमले की शहबाज़ शरीफ़ ने मानी बात

Last Updated May - 17 - 2025, 04:33 PM | Source : Fela News

भारतीय मिसाइल स्ट्राइक की पुष्टि कर PM ने कहा—रात ढाई बजे सेना प्रमुख ने दी सूचना, नूर खान समेत कई ठिकानों को भारी नुकसान
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ पर पाकिस्तान का कबूलनामा
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ पर पाकिस्तान का कबूलनामा

पाकिस्तान ने आखिरकार मान लिया है कि 9-10 मई की रात भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस सहित कई सैन्य ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ खुद स्वीकार करते हैं कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने उन्हें रात 2:30 बजे सुरक्षित फोन पर बताया—“वज़ीर-ए-आज़म साहब, हिंदुस्तान ने बैलिस्टिक मिसाइल दागे हैं; एक नूर खान एयरबेस पर गिरा है और कुछ अन्य इलाकों पर भी।”

नूर खान क्यों अहम है?

• यह पाकिस्तान के वीवीआइपी विमानों और उच्चस्तरीय सैन्य उड़ानों का मुख्य अड्डा है।

• इस्लामाबाद से सटा होने के कारण इसे देश का सबसे संवेदनशील एयरबेस माना जाता है।

• सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि भारतीय वायुसेना ने कमांड-एंड-कंट्रोल यूनिट को निशाना बनाकर गंभीर क्षति पहुंचाई।

पाकिस्तानी बयानबाजी से यू-टर्न

हमले के बाद पाक सरकार ने पहले “कुछ नहीं हुआ” का दावा किया था। अब शरीफ़ का सार्वजनिक स्वीकारोक्ति वही नैरेटिव पलट देती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पारदर्शिता का मकसद घरेलू दबाव कम करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहानुभूति पाना हो सकता है।

क्षति का पहला आकलन

• नूर खान एयरबेस पर एक G-450 वीवीआइपी जेट समेत कई संरचनाएं क्षतिग्रस्त।

• मुरीद, चकवाल और रफीक़ी एयरबेस पर भी मिसाइल इम्पैक्ट के संकेत।

• सेना ने “स्वदेशी वायु रक्षात्मक तकनीक” के प्रयोग का दावा तो किया, पर सैटेलाइट इमेजेज उसके नाकाम रहने की ओर इशारा करती हैं। 

क्षेत्रीय असर और आगे का सवाल

भारत ने हमले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन इस्लामाबाद की स्वीकारोक्ति से कूटनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विश्लेषक मानते हैं कि

1. पाकिस्तान को अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सुरक्षा स्थिति व आतंक-रोध नीति पर कठिन सवालों का सामना करना पड़ेगा।

2. भारत-पाक शांति प्रक्रियाएँ और अधिक ठहराव में जा सकती हैं।

3. चीन-पाक सैन्य सहयोग तथा आईएमएफ-आर्थिक पैकेज पर भी निगाहें टिकी हैं—क्या नुकसान और अस्थिरता नई शर्तें लाएगी?

नज़र अब 18 मई पर

पाकिस्तानी मीडिया में आशंका है कि सीज़फायर टूट सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, यदि इस हमले को “करारा जवाब” माना गया तो नियंत्रण रेखा पर तनाव खतरनाक मोड़ ले सकता है।

फिलहाल, शहबाज़ शरीफ़ की दो-टूक स्वीकारोक्ति साबित करती है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान की सुरक्षा परतें हिला दी हैं—और दक्षिण एशिया की रणनीतिक गणित में एक नया अध्याय जोड़ दिया गया है।

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