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गाजा शांति बोर्ड में पाकिस्तान की एंट्री से बढ़ा विवाद

गाजा शांति बोर्ड में पाकिस्तान की एंट्री से बढ़ा विवाद

Last Updated Jan - 19 - 2026, 12:07 PM | Source : Fela News

ट्रंप ने गाजा के अस्थायी शासन बोर्ड में पाकिस्तान को बुलाया. हमास समर्थन से इजराइल असहज. मिस्र तुर्की के साथ नई कूटनीतिक धुरी बनने के संकेत तेज.
गाजा शांति बोर्ड में पाकिस्तान की एंट्री से बढ़ा विवाद
गाजा शांति बोर्ड में पाकिस्तान की एंट्री से बढ़ा विवाद

गाजा में जारी संघर्ष और तबाही के बाद वहां की अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अमेरिका की पहल ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित 'गाजा बोर्ड ऑफ पीस' में अब पाकिस्तान को भी शामिल होने का न्योता दिया गया है. इस कदम की पुष्टि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने करते हुए इसे गाजा में शांति बहाली और पुनर्निर्माण के लिए एक अहम अवसर बताया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ट्रंप प्रशासन की ओर से औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है. मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से फिलिस्तीन के पक्ष में खड़ा रहा है और गाजा में स्थिरता, मानवीय राहत तथा दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान के लिए अपनी भूमिका निभाने को तैयार है. बयान में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप दो - राष्ट्र समाधान पर पाकिस्तान की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई है.

हालांकि इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है. पाकिस्तान लंबे समय से इजराइल का मुखर विरोध करता रहा है और हमास के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख के लिए भी जाना जाता है. ऐसे में गाजा की प्रशासनिक देखरेख से जुड़े किसी बोर्ड में पाकिस्तान की भागीदारी इजराइल के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है. इजराइली रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका की पारंपरिक इजराइल समर्थक नीति से अलग संकेत देता है.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह कदम पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है. मिस्र और तुर्की पहले ही गाजा के मुद्दे पर सक्रिय हैं. मिस्र गाजा की सीमा से सटा होने के कारण सुरक्षा और राहत कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाता रहा है, जबकि तुर्की मुस्लिम देशों के बीच खुद को फिलिस्तीन समर्थक आवाज के रूप में पेश करता है. अब पाकिस्तान के शामिल होने से यह बोर्ड एक नए भू-राजनीतिक समीकरण की ओर बढ़ता दिख रहा है.

इजराइल के भीतर भी इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो सकती है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही गाजा को लेकर वैश्विक दबाव का सामना कर रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तान जैसे देश को बोर्ड में जगह मिलना उनके लिए कूटनीतिक चुनौती बन सकता है. कई विश्लेषकों का कहना है कि इससे इजराइल और अमेरिका के बीच भी मतभेद की स्थिति पैदा हो सकती है.

अमेरिका की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बोर्ड की अंतिम संरचना क्या होगी और पाकिस्तान को किस भूमिका में शामिल किया जाएगा. व्हाइट हाउस सूत्रों का कहना है कि यह बोर्ड गाजा के पुनर्निर्माण, प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया है.

पाकिस्तान की भागीदारी से एक ओर जहां मुस्लिम देशों के बीच एकजुटता का संदेश जाएगा, वहीं दूसरी ओर यह इजराइल के लिए असहज कूटनीतिक स्थिति भी खड़ी कर सकता है. गाजा का भविष्य अब केवल युद्ध का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और शक्ति संघर्ष का भी केंद्र बन चुका है. आने वाले दिनों में इस बोर्ड की गतिविधियां और सदस्य देशों की भूमिका पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी.

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