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ईरान में क्या छिपाया जा रहा है

ईरान में क्या छिपाया जा रहा है

Last Updated Jan - 17 - 2026, 03:31 PM | Source : Fela News

महज 14 दिनों के भीतर ईरान में 52 कैदियों को फांसी दिए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने पूरे देश में इंटरन
ईरान में क्या छिपाया जा रहा है
ईरान में क्या छिपाया जा रहा है

ईरान से आ रही ताजा खबरें बेहद गंभीर तस्वीर पेश कर रही हैं। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 14 दिनों में ईरान की जेलों में 52 कैदियों को फांसी दी गई। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब देश के कई हिस्सों में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन घटनाओं के बीच ईरानी प्रशासन ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं।

मानवाधिकार समूहों का दावा है कि जिन कैदियों को फांसी दी गई, उनमें से कई पर आरोपों की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी। कुछ मामलों में परिवारों को आखिरी समय तक जानकारी भी नहीं दी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि फांसी की सजा का इस्तेमाल डर का माहौल बनाने और विरोध की आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा है।

विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से महंगाई, बेरोजगारी, सख्त कानूनों और सरकार की नीतियों के खिलाफ हो रहे हैं। अलग-अलग शहरों से प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही थीं, लेकिन इंटरनेट बंद होने के बाद देश के अंदर की जानकारी बाहर आना लगभग रुक गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मैसेजिंग ऐप्स तक पहुंच बंद होने से आम लोगों की आवाज दुनिया तक नहीं पहुंच पा रही।

ईरानी सरकार का कहना है कि इंटरनेट बंद करने का फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है, ताकि अफवाहें न फैलें और हिंसा को रोका जा सके। हालांकि मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि यह कदम सच्चाई को छिपाने और सरकारी कार्रवाई पर सवाल उठने से बचने के लिए उठाया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया आने लगी है। कई मानवाधिकार संगठनों ने ईरान से फांसी की सजा पर रोक लगाने और पारदर्शी न्याय प्रक्रिया अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है और इसके जवाब में मौत की सजा देना गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है।

ईरान में हालात फिलहाल तनावपूर्ण बने हुए हैं। इंटरनेट बंदी के कारण सही आंकड़े और जमीनी स्थिति सामने आना मुश्किल हो गया है। लेकिन 14 दिन में 52 फांसी और विरोध के बीच सख्त कदम यह संकेत दे रहे हैं कि सरकार किसी भी कीमत पर असहमति को दबाने के मूड में है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

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