Last Updated Jan - 28 - 2026, 03:43 PM | Source : Fela News
अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हुई हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कार्रवाई प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए जिम्मेदार नेताओं को निशा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका इसी हफ्ते ईरान पर सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। बताया जा रहा है कि इस संभावित हमले का मकसद उन ईरानी नेताओं और अधिकारियों को निशाना बनाना हो सकता है, जिन्हें हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत का जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि अमेरिका की ओर से अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका में नीति निर्धारण से जुड़े स्तरों पर ईरान की आंतरिक स्थिति और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर लगातार समीक्षा चल रही है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संभावित टारगेट में सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी और वे कमांडर शामिल हो सकते हैं, जिन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश देने के आरोप हैं। इस बीच सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को और प्रभावित कर सकता है।
वहीं दूसरी ओर, ईरान की सरकार ने इन रिपोर्ट्स को मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका पहले भी इस तरह की धमकियों का इस्तेमाल करता रहा है। प्रशासन का कहना है कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। तेहरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा।
इस बीच अमेरिकी राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे पर मतभेद की खबरें हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सीधे सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक और आर्थिक दबाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और जिम्मेदार लोगों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया गया था और मौजूदा हालात में उस नीति की फिर से चर्चा हो रही है। हालांकि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन की ओर से यही कहा गया है कि सभी विकल्प खुले हैं और किसी भी फैसले से पहले सहयोगी देशों से सलाह ली जाएगी। कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान तनाव एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बनता दिख रहा है।
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