Last Updated Feb - 12 - 2026, 12:01 PM | Source : Fela News
बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मतदान शुरू हो गया है। बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने वोट डाला, जबकि शेख हसीना की पार्टी ने चुनाव को नकली और दिखावटी करार द
महीनों से जारी राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक प्रदर्शनों और सत्ता संघर्ष के बाद बांग्लादेश में आखिरकार आम चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य की परीक्षा माना जा रहा है। साल 2024 में हुए तख्तापलट और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह पहला बड़ा राष्ट्रीय चुनाव है, जिस पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी नजर रखी जा रही है।
गुरुवार सुबह मतदान शुरू होते ही प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर वोट डाला। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने ढाका के गुलशन मॉडल स्कूल-कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर अपनी पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान और बेटी जैमा रहमान के साथ मतदान किया। मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और यह चुनाव देश को स्थिरता की ओर ले जाएगा । तारिक रहमान इस बार दो निर्वाचन क्षेत्रों-ढाका- 17 और बोगरा - 6 - से चुनाव मैदान में हैं, जिससे उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और पार्टी की रणनीति साफ झलकती है।
हालांकि, चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही विवाद भी तेज हो गया। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने इस चुनाव को “नकली ” और “दिखावटी” बताया है। पार्टी का आरोप है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की गारंटी नहीं देता। आवामी लीग नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति पर ध्यान दें और देश को "राजनीतिक विघटन" से बचाने के लिए हस्तक्षेप करें।
इस चुनाव में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने मतदान के बाद कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ संतुलित और सम्मानजनक संबंध बनाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य संघर्ष नहीं, बल्कि विकास और स्थिरता है। यह बयान खासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
सुरक्षा के लिहाज से इस चुनाव को बेहद संवेदनशील माना गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, आधे से अधिक मतदान केंद्रों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। लगभग 90 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। राजधानी ढाका में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और कई जगहों पर बॉडी कैमरा से लैस सुरक्षा कर्मी निगरानी कर रहे हैं। हाल के महीनों में हुए विरोध प्रदर्शनों और झड़पों को देखते हुए प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सतर्क है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती या कमजोरी को उजागर करेगा। पिछले दो वर्षों में देश ने राजनीतिक ध्रुवीकरण, आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक असंतोष का सामना किया है। ऐसे में जनता की अपेक्षाएं काफी बढ़ी हुई हैं।
अब निगाहें मतगणना और अंतिम परिणामों पर टिकी हैं। यह स्पष्ट है कि चुनाव परिणाम चाहे जो हों, बांग्लादेश की राजनीति में नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि देश की स्थिरता, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
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