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ग्रीनलैंड पर बढ़ा तनाव : डेनमार्क बोला- पहले गोली, फिर बातचीत

ग्रीनलैंड पर बढ़ा तनाव : डेनमार्क बोला- पहले गोली, फिर बातचीत

Last Updated Jan - 09 - 2026, 05:41 PM | Source : Fela News

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी दावों के बीच डेनमार्क ने सख्त चेतावनी दी है—हमले की स्थिति में सैनिक बिना आदेश इंतजार किए सीधे जवाबी फायरिंग करेंगे।
ग्रीनलैंड पर बढ़ा तनाव
ग्रीनलैंड पर बढ़ा तनाव

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों के बाद अब डेनमार्क ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अगर उसके क्षेत्र या हितों पर किसी भी तरह का सैन्य हमला हुआ, तो उसके सैनिक बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी या कमांडर के आदेश का इंतजार किए तुरंत जवाबी कार्रवाई करेंगे।

डेनमार्क की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। ग्रीनलैंड, जो भौगोलिक रूप से उत्तर अमेरिका के करीब है, रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यह इलाका डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन अमेरिका लंबे समय से यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, नए सुरक्षा निर्देशों के तहत फ्रंटलाइन पर तैनात सैनिकों को यह अधिकार दिया गया है कि किसी भी संभावित हमले या खतरे की स्थिति में वे तुरंत फायरिंग कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें ऊपर से आदेश आने का इंतजार नहीं करना होगा। डेनमार्क का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने के लिए लिया गया है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को औपचारिक रूप से खरीदे बिना भी उस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकता है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, सैन्य सहयोग, इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश और सुरक्षा समझौतों के जरिए अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा सकता है। हालांकि डेनमार्क ने ऐसे किसी भी प्रयास को अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताया है।

ग्रीनलैंड में पहले से ही अमेरिका का एक बड़ा सैन्य बेस मौजूद है, जो आर्कटिक क्षेत्र की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन हालिया बयानों और रणनीतिक हलचलों ने डेनमार्क को सतर्क कर दिया है। डेनमार्क सरकार का कहना है कि वह किसी भी सूरत में अपने क्षेत्रीय अधिकारों से समझौता नहीं करेगी।

राजनयिक जानकारों का मानना है कि डेनमार्क का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका को चेतावनी देने के लिए नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सुरक्षा संदेश है कि देश अब किसी भी तरह के खतरे को हल्के में नहीं लेगा। हालांकि, ट्रम्प के ग्रीनलैंड को लेकर पुराने बयानों को देखते हुए इस चेतावनी को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

ग्रीनलैंड को लेकर यह बयानबाजी बताती है कि आने वाले समय में आर्कटिक क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा समीकरण और ज्यादा जटिल हो सकते हैं। डेनमार्क का साफ संदेश हैपहले देश की सुरक्षा, उसके बाद कूटनीति।

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