Last Updated Oct - 10 - 2025, 06:26 PM | Source : Fela News
इस बार का शुक्रवार डोनाल्ड ट्रंप के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा। नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में उनका नाम पीछे चला गया है, और इसके पीछे की वजहें अंतरराष्ट्रीय र
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह शुक्रवार शायद उम्मीदों के विपरीत साबित होने जा रहा है। नोबेल शांति पुरस्कार की रेस में जिन दावेदारों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, उनमें ट्रंप का नाम अब पीछे छूट गया है। कभी खुद को “शांति का दूत” कहने वाले ट्रंप के लिए यह झटका किसी राजनीतिक हार से कम नहीं माना जा रहा।
दरअसल, ट्रंप को उम्मीद थी कि उनके कार्यकाल के दौरान किए गए कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौते—जैसे अब्राहम एकॉर्ड और उत्तर कोरिया के साथ वार्ता—उन्हें नोबेल कमेटी की नज़र में ऊपर रखेंगे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति, घरेलू विवाद और चुनावी बयानों ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया।
नोबेल कमेटी अक्सर उन नेताओं को प्राथमिकता देती है जिन्होंने शांति, संवाद और स्थिरता की दिशा में ठोस कदम उठाए हों। वहीं ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका कई बार अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलग हुआ, ईरान डील से बाहर निकला और चीन व यूरोप के साथ रिश्ते बिगाड़े। यही वजह है कि उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप अब इस फैसले को अपने चुनावी प्रचार में भी मुद्दा बना सकते हैं। वे पहले भी दावा कर चुके हैं कि “मीडिया और संस्थाएं” उनके खिलाफ पक्षपाती हैं।
इस बीच, नोबेल शांति पुरस्कार की रेस में इस बार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, जलवायु सुधारकों और यूक्रेन शांति वार्ताकारों के नामों की चर्चा ज़्यादा है। ऐसे में ट्रंप का नाम धीरे-धीरे इस सूची से दूर होता जा रहा है।
अब सवाल यही है कि क्या यह “बुरा शुक्रवार” ट्रंप की राजनीतिक रणनीति को और आक्रामक बनाएगा या फिर वह अपनी पुरानी छवि को सुधारने के लिए कोई नया कूटनीतिक दांव खेलेंगे।