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ट्रम्प ने लॉस एंजिल्स में नेशनल गार्ड तैनात किए, नागरिक अधिकारों पर उठे सवाल

ट्रम्प ने लॉस एंजिल्स में नेशनल गार्ड तैनात किए, नागरिक अधिकारों पर उठे सवाल

Last Updated Jun - 09 - 2025, 11:26 AM | Source : Fela News

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बिना कैलिफ़ोर्निया गवर्नर की सहमति 2,000 नेशनल गार्ड सैनिक लॉस एंजिल्स में तैनात किए हैं, जिससे अमेरिका में विरोध प्रदर्
ट्रम्प ने लॉस एंजिल्स में नेशनल गार्ड तैनात किए
ट्रम्प ने लॉस एंजिल्स में नेशनल गार्ड तैनात किए

अमेरिका में ICE (इमिग्रेशन और कस्टम्स एंफोर्समेंट) द्वारा दिन-मजदूरों के खिलाफ छापेमारी के विरोध में लॉस एंजिल्स में भड़के प्रदर्शन, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं  । इस प्रतिक्रिया में शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रम्प ने Title 10 कानून का सहारा लेते हुए 2,000 नेशनल गार्ड सैनिक तैनात करने का आदेश दिया — यह पहला मौका है जब किसी राष्ट्रपति ने एक राज्य की गवर्नर की आपत्ति के बावजूद ऐसा किया है  ।

राज्य सरकार ने वास्तविक स्थिति को नियंत्रित बताया

कैलिफ़ोर्निया गवर्नर गैविन न्यूज़म और लॉस एंजिल्स की मेयर कैरन बैस ने दोनों ने फ़ैसले की कड़ी निंदा की। न्यूज़म ने इसे “जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया” बताया और कहा कि स्थानीय पुलिस स्थिति पर नियंत्रण रख रही थी 

संवैधानिक व कानूनी विवाद

विशेषज्ञों और कानूनी विद्वानों ने ट्रम्प के इस कदम को संवैधानिक दृष्टि से अनुचित और लोकतांत्रिक आदर्शों के खिलाफ बताया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह प्रसिद्ध अधिकारों पर एक गंभीर हमला है और भविष्य में इस तरह के कदमों को अग्रिम आदेश के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है 

फेडरल कार्रवाई या राजनीतिक नाटक?

कुछ आलोचकों का कहना है कि यह फेडरल टुकड़ी सिर्फ प्रदर्शनकारियों को उकसाने का एक तरीका है, ताकि ट्रम्प खुद को ‘कड़क नेता’ के रूप में प्रस्तुत कर सकें  । वहीं, प्रशासन का मानना है कि यह कदम “कानून व्यवस्था बहाल करने” के मकसद से उठाया गया, लेकिन विरोध में कहा गया कि इसे आगे जाकर एक्टिव ड्यूटी सैनिकों की मौजूदगी तक बढ़ाया जा सकता है 

मुख्य तथ्य:

  • 2,000 नेशनल गार्ड सैनिक तैनात किए गए, राज्य सरकार की आपत्ति के बावजूद।
  • प्रदर्शन ICE छापों के विरोध में हिंसक हो गए, स्थानीय पुलिस ने स्थिति नियंत्रित बताई।
  • स्थानीय नेतृत्व ने इसे ‘राजनीतिक नाट्य’ बताया, वहीं राष्ट्रपति ने इसे “कानून व्यवस्था बहाल करने” वाला कदम बताया।
  • कानूनी विद्वानों ने इसे संवैधानिक और लोकतांत्रिक नियमों के खिलाफ करार दिया।
  • यह घटना नागरिक अधिकारों, संघीय–राज्य विवाद और पुलिस–सैन्य के दायरे में नए सवाल खड़े कर रही है।

 

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