Last Updated Oct - 04 - 2025, 03:41 PM | Source : Fela News
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा से जुड़े फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है। इसमें 100,000 डॉलर की फीस बढ़ोतरी को अवैध बताया गया है और इस कदम का भविष्य अ
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का H-1B वीजा नियम अब विवादों में है। नए नियम के तहत H-1B वीजा के लिए फीस में भारी बढ़ोतरी की गई थी, जिसे कई कंपनियों और वीजा आवेदकों ने असंवैधानिक बताया। अब इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है, जिससे अमेरिकी अदालत में इस मसले की सुनवाई शुरू होने वाली है।
सूत्रों के मुताबिक, नए नियम में वीजा फीस 100,000 डॉलर तक बढ़ाई गई थी, जो विशेषकर बड़े टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग सेक्टर के लिए महंगा साबित हो सकता है। विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि यह वृद्धि रोजगार और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए भारी बाधा पैदा करेगी।
ये भी पढ़ें क्या वाकई ट्रंप नार्सिसिस्ट हैं? नोबेल, जीनियस और आडंबर पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का फैसला न केवल H-1B वीजा के नियमों पर असर डालेगा, बल्कि अमेरिका में विदेशी प्रतिभाओं को लाने की नीति पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है। अगर अदालत इस फैसले को रद्द करती है, तो फीस को वापस पुराने स्तर पर लाया जा सकता है।
ट्रंप प्रशासन के समर्थक कहते हैं कि यह कदम अमेरिकी रोजगार और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में स्थानीय कर्मचारियों को बढ़ावा देने के लिए जरूरी था। वहीं आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक साबित होगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगा।
अब सभी की नजरें अदालत पर टिकी हैं, क्योंकि H-1B वीजा नियम का अंतिम निर्णय विदेशी पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों दोनों के लिए अहम साबित होगा।