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ट्रंप का सख्त वार: ट्रेड डील में चाल चली तो भारी टैरिफ

ट्रंप का सख्त वार: ट्रेड डील में चाल चली तो भारी टैरिफ

Last Updated Feb - 24 - 2026, 12:42 PM | Source : Fela News

डोनाल्ड ट्रंप ने चेताया है कि जो देश अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों में 'गेम' खेलेंगे, उन पर और ज्यादा टैरिफ लगाया जाएगा। फैसले से वैश्विक बाजारों में हलचल तेज ।
ट्रेड डील में चाल चली तो भारी टैरिफ
ट्रेड डील में चाल चली तो भारी टैरिफ

अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर एक बार फिर सख्त बयानबाजी सामने आई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जो भी देश अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों में "गेम खेलने की कोशिश करेगा, उसे और ज्यादा टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उनके कुछ टैरिफ आदेशों पर सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह व्यापार के मुद्दे पर नरम रुख अपनाने के पक्ष में नहीं हैं। 

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को लंबे समय से कई देशों ने व्यापारिक समझौतों में नुकसान पहुंचाया है। उनका आरोप है कि कुछ देश समझौते के दौरान एक बात मानते हैं, लेकिन बाद में नियमों में बदलाव कर देते हैं या शर्तों का फायदा उठाते हैं। ऐसे देशों के लिए उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर वे व्यापारिक प्रक्रिया में चालाकी दिखाएंगे, तो अमेरिका और अधिक कठोर आयात शुल्क लगाएगा। 

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि व्यापक स्तर पर टैरिफ लागू करने की शक्ति सीमित है और इसे कानूनी दायरे में रहकर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालांकि, ट्रंप ने इस फैसले की आलोचना की और कहा कि राष्ट्रपति के पास देश के आर्थिक हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत नए टैरिफ लागू करने का रास्ता तलाश सकते हैं। 

ट्रंप की यह सख्त चेतावनी केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके वैश्विक आर्थिक असर भी देखे जा रहे हैं। यूरोपीय संघ, चीन, भारत और अन्य बड़े व्यापारिक साझेदार इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। कई देशों ने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं में सतर्क रुख अपनाया है। कुछ मामलों में बातचीत को अस्थायी रूप से धीमा भी किया गया है, ताकि नई परिस्थितियों का आकलन किया जा सके। 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका बड़े पैमाने पर टैरिफ बढ़ाता है, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन और बाजारों पर पड़ सकता है। आयात शुल्क बढ़ने से वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा। साथ ही, जवाबी कार्रवाई के तौर पर अन्य देश भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगा सकते हैं, जिससे व्यापार युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। 

भारत के संदर्भ में भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। भारत-अमेरिका व्यापार संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं, लेकिन टैरिफ को लेकर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। यदि अमेरिका नई सख्ती अपनाता है, तो भारतीय निर्यातकों को विशेषकर स्टील, ऑटो पार्ट्स और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में दबाव झेलना पड़ सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद जारी है और समाधान की कोशिशें भी चल रही हैं। 

ट्रंप के समर्थकों का तर्क है कि सख्त टैरिफ नीति से अमेरिकी उद्योगों को सुरक्षा मिलती है और घरेलू रोजगार बढ़ते हैं। उनका मानना है कि यह रणनीति अमेरिका को व्यापार घाटे से उबारने में मदद कर सकती है। वहीं आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक टैरिफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है और अमेरिका के भीतर भी महंगाई बढ़ सकती है। 

कुल मिलाकर, ट्रंप की चेतावनी ने वैश्विक व्यापार जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह बयान केवल दबाव बनाने की रणनीति है या वास्तव में नई टैरिफ नीति लागू की जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर आने वाले महीनों में स्पष्ट दिखाई दे सकता है। 

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