Last Updated Mar - 05 - 2025, 04:38 PM | Source : Fela News
अमेरिका और चीन के बीच तनाव चरम पर है। डोनाल्ड ट्रंप की सख्त नीतियों और चीन की आक्रामक कूटनीति ने टैरिफ वॉर को नया मोड़ दे दिया है, जो अब खुलेआम "युद्ध" की धमकिय
दुनिया के दो महाशक्तियों के बीच तनातनी अपने चरम पर है। एक तरफ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो अपने बेबाक और सख्त फैसलों के लिए मशहूर हैं। दूसरी तरफ है चीन, जो अपनी आक्रामक कूटनीति और सख्त बयानबाज़ी के लिए जाना जाता है। इस बार मुद्दा है — टैरिफ वॉर। लेकिन हालात अब सिर्फ आर्थिक जंग तक सीमित नहीं रह गए, बात अब खुलेआम "युद्ध" की धमकियों तक पहुंच चुकी है।
टैरिफ वॉर: कैसे भड़की आग?
कहानी की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि अमेरिका अब 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लागू करेगा। मतलब साफ था — "जैसा करोगे, वैसा भरोगे" जो भी देश अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगाएगा, अमेरिका भी उन्हीं शर्तों पर जवाब देगा। ट्रंप ने यूरोपीय संघ, भारत, चीन, ब्राजील समेत कई देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों से इन देशों ने अमेरिका पर बेइंतहा टैरिफ लगाए हैं, जो अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ट्रंप ने खासतौर पर भारत और चीन पर निशाना साधते हुए कहा, "भारत हम पर 100% टैरिफ लगाता है। चीन हमारे उत्पादों पर दोगुना टैरिफ लगाता है। दक्षिण कोरिया का औसत टैरिफ चार गुना ज्यादा है। लेकिन अब हमारी बारी है"
चीन ने दिया करारा जवाब
डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान ने वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचा दी। लेकिन असली धमाका तब हुआ जब चीन ने अपनी प्रतिक्रिया दी। अमेरिका में चीन के दूतावास ने ट्रंप की इस रणनीति को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक कहा —
"अगर अमेरिका युद्ध चाहता है, तो युद्ध ही सही। फिर चाहे वो आर्थिक युद्ध हो या किसी और तरह का, हम अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं"
चीन के इस बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। एक तरफ ट्रंप की आक्रामक नीति थी, तो दूसरी तरफ चीन का साफ-साफ ऐलान कि वो किसी भी सूरत में झुकने को तैयार नहीं।
2 अप्रैल: क्या बनेगा नया मोर्चा?
ट्रंप प्रशासन ने ऐलान किया है कि 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लागू हो जाएगा। यानी अमेरिका उन सभी देशों पर भारी टैरिफ लगाएगा, जिन्होंने अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाए हैं। इससे चीन, भारत, यूरोपीय संघ और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की चिंता बढ़ गई है।
क्यों है ये 'टैरिफ वॉर' खतरनाक?
यह सिर्फ आर्थिक नीतियों की लड़ाई नहीं है। यह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच वर्चस्व की जंग बन चुकी है। अगर अमेरिका अपने टैरिफ बढ़ाता है, तो चीन भी जवाबी कार्रवाई करेगा। इसका असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल जाएगी।
क्या होगा आगे?
अब सबकी नजरें 2 अप्रैल पर टिकी हैं। ट्रंप का रुख साफ है — "अमेरिका फर्स्ट"। दूसरी ओर, चीन भी पीछे हटने को तैयार नहीं। ऐसे में यह टैरिफ वॉर कब तक चलता है और इसका असर दुनिया पर क्या पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
एक बात तो तय है — इस जंग में सिर्फ व्यापार दांव पर नहीं है, बल्कि दोनों देशों की प्रतिष्ठा भी। और जब बात "प्रतिष्ठा" की हो, तो जंग का अंत आसान नहीं होता