Last Updated Feb - 03 - 2026, 04:25 PM | Source : Fela news
भारत पर 500 फीसदी टैरिफ प्रस्ताव के बाद बयानबाजी बदली है। अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने अब भारत को लेकर नरम रुख अपनाते हुए रूस संदर्भ में नई बातें कही हैं।
अमेरिका में भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने से जुड़े प्रस्ताव को लेकर चर्चा के बीच अब उस बिल को आगे बढ़ाने वाले रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम के बदले हुए रुख पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हाल ही में दिए गए एक बयान में ग्राहम ने भारत की भूमिका को लेकर अपेक्षाकृत संतुलित और सकारात्मक भाषा का इस्तेमाल किया है, जिससे उनके पहले के सख्त रुख से अलग संकेत मिलते हैं।
सूत्रों के अनुसार लिंडसे ग्राहम ने पहले भारत सहित कुछ देशों पर रूस से तेल और अन्य आर्थिक संबंधों को लेकर कड़ा रुख अपनाने की बात कही थी। इसी संदर्भ में भारत पर भारी टैरिफ लगाने वाले बिल का जिक्र सामने आया था। उस समय उनका बयान अमेरिका की रूस नीति के समर्थन और दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा गया था।
इस बीच ताजा बयान में ग्राहम ने कहा है कि भारत की स्थिति जटिल है और वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे साझेदार देशों के साथ संवाद और सहयोग के जरिए ही रूस पर प्रभावी दबाव बनाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इस बयान में भारत की रणनीतिक अहमियत और वैश्विक भूमिका को भी स्वीकार किया गया है।
वहीं दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि भारत-अमेरिका संबंध बहुआयामी हैं और केवल एक मुद्दे के आधार पर इन्हें नहीं देखा जाना चाहिए। प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि व्यापार, रक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के रिश्तों की अहम कड़ी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ग्राहम के बदले सुर को अमेरिकी घरेलू राजनीति और कूटनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत अमेरिका के लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार है और ऐसे में अत्यधिक कठोर कदम दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकते हैं। यही वजह है कि अब बयानबाजी में संतुलन नजर आ रहा है।
फिलहाल भारत पर 500 फीसदी टैरिफ से जुड़े बिल को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस में इस प्रस्ताव पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर अमेरिकी नेताओं के बयान किस दिशा में जाते हैं।
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