Last Updated Jan - 16 - 2026, 01:20 PM | Source : Fela News
तेहरान पर खतरे की चर्चा के बीच एक बार फिर ईरान की भौगोलिक ताकत सुर्खियों में है। पहाड़ों की वो दीवार, जिसने सदियों से दुश्मनों की राह रोकी है।
मध्य पूर्व में जब भी ईरान पर हमले की आशंका बढ़ती है, एक सवाल बार-बार उठता है कि आखिर इस देश को इतनी मजबूती कौन देता है। जवाब सिर्फ उसकी सेना या मिसाइल सिस्टम नहीं, बल्कि उसकी जमीन भी है। ईरान के चारों तरफ फैली ऊंची और दुर्गम पर्वत श्रृंखलाएं किसी प्राकृतिक किले से कम नहीं मानी जातीं। इन्हें ही ईरान का ‘हिमालय’ कहा जाता है।
ईरान में ज़ाग्रोस और अल्बोर्ज पर्वत श्रृंखलाएं देश की सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती हैं। ज़ाग्रोस पहाड़ियां पश्चिमी सीमा से लेकर दक्षिण तक फैली हैं, जबकि अल्बोर्ज पर्वत उत्तर में कैस्पियन सागर के पास मौजूद हैं। राजधानी तेहरान के बेहद करीब अल्बोर्ज पहाड़ स्थित हैं, जो किसी भी बाहरी हमले के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं।
इतिहास गवाह है कि इन पहाड़ों ने ईरान को कई बार बचाया है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युद्धों तक, विदेशी सेनाओं के लिए इन इलाकों में घुसपैठ आसान नहीं रही। ऊंचाई, संकरी घाटियां, कठिन मौसम और सीमित रास्ते किसी भी बड़े सैन्य अभियान को धीमा कर देते हैं। यही वजह है कि ईरान के दुश्मनों को सिर्फ सीमा पार करना ही नहीं, बल्कि भीतर तक पहुंचना भी बेहद मुश्किल लगता है।
सैन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कभी तेहरान पर सीधा हमला होता है, तो इन पर्वतों की वजह से एयर स्ट्राइक और जमीनी ऑपरेशन दोनों जटिल हो जाएंगे। रडार सिस्टम, सुरंगें और सैन्य ठिकाने पहाड़ी इलाकों में छिपे होने से उन्हें निशाना बनाना आसान नहीं होता। ईरान ने इन प्राकृतिक हालात का इस्तेमाल करते हुए अपनी रक्षा रणनीति को और मजबूत किया है।
हालांकि आधुनिक युद्ध सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं हैं। मिसाइल, ड्रोन और साइबर हमले जैसे खतरे इन पहाड़ों की भूमिका को सीमित भी कर सकते हैं। इसके बावजूद, किसी भी पूर्ण पैमाने के सैन्य हमले में भूगोल आज भी अहम भूमिका निभाता है।
कुल मिलाकर, ईरान की असली ताकत उसकी बंदूक या वर्दी से कहीं आगे उसकी धरती में छिपी है। ज़ाग्रोस और अल्बोर्ज की पहाड़ियां आज भी देश के लिए एक अदृश्य ढाल बनी हुई हैं। सवाल बस इतना है कि बदलते दौर की जंग में क्या ये प्राकृतिक दीवारें खामेनेई की सेना को पहले की तरह बचा पाएंगी।
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