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ट्रंप को खुली चुनौती क्यों दे बैठे पेट्रो

ट्रंप को खुली चुनौती क्यों दे बैठे पेट्रो

Last Updated Jan - 06 - 2026, 03:55 PM | Source : Fela News

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद लैटिन अमेरिका में माहौल गरमा गया है और कोलंबिया के राष्ट्रपति का बयान अमेरिका को सीधी चेतावनी माना जा रहा है
ट्रंप को खुली चुनौती क्यों दे बैठे पेट्रो
ट्रंप को खुली चुनौती क्यों दे बैठे पेट्रो

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद लैटिन अमेरिका में राजनीतिक तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। पेट्रो ने सार्वजनिक रूप से कहा, “आओ मुझे ले जाओ”, जिसे ट्रंप के लिए खुली चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, पेट्रो का यह बयान अमेरिका की उस नीति के खिलाफ है, जिसके तहत वह दूसरे देशों के नेताओं को गिरफ्तार करने या उन पर कानूनी कार्रवाई करने की बात करता है। मादुरो की गिरफ्तारी को पेट्रो ने लैटिन अमेरिकी देशों की संप्रभुता पर हमला बताया। उनका कहना है कि अमेरिका को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि किस देश का नेता सही है और किसे अपराधी घोषित किया जाए।

कोलंबिया के राष्ट्रपति ने साफ कहा कि अगर अमेरिका इस तरह की कार्रवाई को सामान्य बनाना चाहता है, तो फिर वह खुद भी इसके लिए तैयार हैं। उनका यह बयान सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि अमेरिका के बढ़ते दखल के खिलाफ एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। पेट्रो पहले भी अमेरिका की विदेश नीति की आलोचना करते रहे हैं, खासकर लैटिन अमेरिका में हस्तक्षेप को लेकर।

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कई वामपंथी और अमेरिका-विरोधी नेता खुलकर सामने आ गए हैं। उनका मानना है कि यह कदम सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि शक्ति और दबदबे की राजनीति है। पेट्रो ने यह भी कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी और देशों के बीच अविश्वास गहरा होगा।

दूसरी ओर अमेरिका का रुख अब तक सख्त बना हुआ है। वॉशिंगटन का कहना है कि वह लोकतंत्र और कानून के शासन के पक्ष में खड़ा है। हालांकि, पेट्रो जैसे नेताओं के बयान यह दिखाते हैं कि अमेरिका की यह नीति अब खुले विरोध का सामना कर रही है।

कुल मिलाकर, मादुरो की गिरफ्तारी के बाद मामला सिर्फ वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहा। कोलंबिया के राष्ट्रपति की चुनौती ने साफ कर दिया है कि लैटिन अमेरिका में अमेरिका के खिलाफ नाराजगी अब शब्दों से आगे बढ़ती नजर आ रही है।

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