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क्यों नहीं बुझ रही अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर की आग

क्यों नहीं बुझ रही अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर की आग

Last Updated Nov - 10 - 2025, 05:37 PM | Source : Fela News

अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच झड़पें और गोलाबारी जारी है। कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद हालात नहीं सुधर रहे।
क्यों नहीं बुझ रही अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर की आग
क्यों नहीं बुझ रही अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर की आग

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों के रिश्तों में खटास की जड़ एक पुरानी सीमा रेखा है — ड्यूरैंड लाइन। यह वही रेखा है जिसने 132 साल पहले अविभाजित भारत के नक्शे को बदल दिया था, और आज भी दोनों देशों के बीच विवाद का कारण बनी हुई है।

ड्यूरैंड लाइन को साल 1893 में ब्रिटिश अधिकारी सर मॉर्टिमर ड्यूरैंड ने खींचा था। इसका उद्देश्य ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच सीमा तय करना था। लेकिन यह रेखा स्थानीय जनजातियों को दो हिस्सों में बांट गई , खासतौर पर पश्तून जनजाति, जो आज भी इस फैसले को स्वीकार नहीं करती।

अफगानिस्तान ने कभी इस सीमा को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी वैध अंतरराष्ट्रीय सीमा बताता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच अक्सर गोलीबारी और संघर्ष की खबरें आती रहती हैं। हाल ही में भी सीमा पार से झड़पों में कई लोगों की मौत हुई, जिसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है।

तालिबान शासन के आने के बाद उम्मीद थी कि रिश्ते सुधरेंगे, क्योंकि पाकिस्तान को तालिबान के साथ अपने पुराने रिश्तों पर भरोसा था। लेकिन हालात उलटे पड़ गए। तालिबान सरकार अब खुले तौर पर कह रही है कि वह ड्यूरैंड लाइन को “गैरकानूनी” मानती है और इसे स्वीकार नहीं करेगी। यही बयान दोनों देशों के बीच नए विवाद की वजह बना।

ड्यूरैंड लाइन की लंबाई करीब 2,640 किलोमीटर है, जो पहाड़ी और आदिवासी इलाकों से गुजरती है। इन क्षेत्रों में सीमा नियंत्रण बेहद मुश्किल है और आतंकवादी गतिविधियां भी यहीं सबसे ज़्यादा होती हैं। पाकिस्तान इन इलाकों को सुरक्षित करने के लिए बाड़ लगा चुका है, लेकिन तालिबान इसे तोड़ने या हटाने की चेतावनी दे चुका है।

132 साल पुरानी यह लकीर आज भी खून और बारूद से सनी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों ही अपनी-अपनी दलीलों पर अड़े हैं। लेकिन असली नुकसान उन हजारों लोगों का हो रहा है जो इस सीमा के दोनों ओर रहते हैं ,जिनके लिए यह विवाद सिर्फ नक्शे की लकीर नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की जंग बन चुका है।

 

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